आरुषि-हेमराज हत्याकांड पर फैसला, क्या कहते हैं लोग?

अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 25 Nov 2013 08:23 PM IST
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देश-दुनिया की निगाहें आज यूपी के गाजियाबाद कोर्ट पर लगी थीं, जहां आरुषि-हेमराज हत्याकांड मामले में राजेश तलवार और नुपूर तलवार को कोर्ट ने दोषी पाया है।
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कोर्ट इस मामले में दोनों को मंगलवार को सजा सुनाएगा। देश की इस सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री को लेकर ट्विटर में भी जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
@bwoyblunder आरुषि हत्याकांड में सफेद (सच) और काला (झूठ) नहीं है। इसमें अगर कुछ है तो वो है ग्रे (कंफ्यूजन)। इतनी बुरी जांच के लिए धन्यवाद।
पढ़ें:- आरुषि के मां-बाप पर शक की 5 बड़ी वजहें

@Manuj_Khurana तलवार ने आरुषि की हत्या की या नहीं यह तो अंत में सुप्रीम कोर्ट निर्णय करेगा लेकिन यह तय है कि सीबीआई ने इस मामले की जान ले ली।

@purpleslush_ भगवान ने नर्क में तलवार दंपत्ति के लिए अलग कोना रखा होगा। इस हत्याकांड ने मुझे हिला दिया।

पढ़ें:- आरुषि केस के 5 साल, कब क्या हुआ?

@Pagal_chorri : बचपन में पढ़ी थी, "पूत कपूत हो सकता है, माता कुमाता नहीं" मैं अब भी इसपर विश्वास करती हूं।

@ArushKakkar: आरुषि हत्याकांड पर फैसला ठोस सबूत पर नहीं लिया गया है बल्कि सामाजिक पूर्वाग्रह इसके लिए दोषी है। दुखी करने वाला मामला।

पढ़ें:- पुलिस की 5 गलतियां, जिनसे उलझा आरुषि मर्डर केस

@sagarikaghose यूपी पुलिस का कहना है कि वो छत की छानबीन नहीं कर पाए क्योंकि तलवार दंपति के पास छत के दरवाज़े की चाबी नहीं थी, हास्यास्पद है: उन्होंने दरवाज़ा क्यों नहीं तोड़ा?

आकांक्षाः क्या वे दोनों इंसान हैं? अपनी बेटी को मार डाला? कैसे?

डॉ स्टेंजलवः हम सभी ने आरुषि की हत्या की है।

पढ़ें:- आरुषि-हेमराज हत्याकांड जैसे 5 हाई-प्रोफाइल मामले

नयनिमा बसुः अगर तलवार दंपत्ति दोषी हैं तो अभिभावकों ने विश्वास तोड़ डाला और अगर वो दोषी नहीं हैं तो न्यायालय ने विश्वास तोड़ा।

सुविना माथुरः आरुषि की आत्मा को शांति मिले। देर से ही सही लेकिन न्याय मिला।

अंबरीनः अंधा कानून।

प्रीति कौरः आरुषि इन सबको समझने के लिए बहुत छोटी थी। उसे समझाया जा सकता था। पिता ने कत्ल कर दिया, लेकिन एक मां कैसे कत्ल कर सकती है?

कार्तिक दयानंदः आसान और आलसी पत्रकारिता के कारण आरुषि हत्याकांड का यह हाल हुआ। इतना झोल।

पूजा चौधरीः शरलॉक होम्स के अनुसार जब आप सारी संभावनाएं दबा देते हैं, उसके बाद जो बचता है उसे सच्चाई कहते हैं।

अमोल देशमुखः मुझे लगता है आरुषि जैसी हमारे देश में कई और लड़कियां हैं, उनका क्या?

सुमन शर्माः एक लड़की अपने घर में अपने माता-पिता के साथ ही सुरक्षित नहीं है। यह कितना तकलीफदेह है?
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