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अरुणा राय ने सोनिया की एनएसी से तोड़ा नाता
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Wed, 29 May 2013 09:08 PM IST
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रोजगार गारंटी और सूचना का अधिकार कानून बनाने में अहम भूमिका निभाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय अब राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) में नहीं होंगी।
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उन्होंने यूपीए और एनएसी की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिख कर उन्हें अगला कार्यकाल देने पर विचार न करने का अनुरोध किया था।
सोनिया ने उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। हालांकि सोनिया ने अरुणा को एनएसी के बाहर सामाजिक क्षेत्र में चलाए जाने वाले अभियानों को समर्थन देने का भरोसा दिया है। बतौर एनएसी सदस्य अरुणा का कार्यकाल आगामी शुक्रवार को समाप्त हो रहा है।
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अरुणा ने बताया कि उन्होंने अपनी ओर से सोनिया को पत्र लिख कर एनएसी में एक और कार्यकाल न देने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है।
उन्होंने कहा कि अब वह सामाजिक क्षेत्र में जरूरी अभियान चलाने पर ध्यान देंगी। पत्र के जवाब में सोनिया ने उन्हें सामाजिक अभियानों के लिए अपना समर्थन जारी रखने का भरोसा दिया है।
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बतौर एनएसी सदस्य अरुणा ने न केवल सूचना का अधिकार और मनरेगा के तहत रोजगार गारंटी कानून बनाने में अहम भूमिका निभाई।
बल्कि सूचना का अधिकार कानून में संशोधन कर इसे कमजोर बनाने के प्रयासों का भी जमकर विरोध किया। माना जाता है कि अरुणा के विरोध के चलते ही इस कानून में सरकार संशोधन नहीं कर पाई।
इसके अतिरिक्त अरुणा ने मनरेगा के तहत न्यूनतम मजदूरी कम किए जाने की कोशिशों का भी तीखा और सार्वजनिक विरोध जताया था। इस मामले में वह प्रधानमंत्री की तीखी आलोचना करने से भी नहीं चूकीं।
यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में खाद्य सुरक्षा विधेयक का मसौदा तैयार करने में भी अरुणा ने अहम भूमिका निभाई। हालांकि इस विधेयक को अभी कानूनी जामा नहीं पहनाया जा सका है।