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जेटली ने मनमोहन को बताया असहाय पीएम
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 22 Dec 2013 01:49 AM IST
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संप्रग सरकार में प्रधानमंत्री के निर्णयों को अंतिम न माने जाने के तरीके पर तीखा प्रहार करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने कहा कि भारत के लिए गैर-राजनीतिक व्यक्ति प्रधानमंत्री के रूप में उचित नहीं है।
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विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र को कॉरपोरेट की तर्ज पर नहीं चलाया जा सकता। शनिवार को फिक्की की वार्षिक महासभा में जेटली ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पद कोई रोजगार नहीं है। सरकार में प्रधानमंत्री की बात आखिरी होनी चाहिए।
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राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि भारत को अब यह समझना चाहिए कि कॉरपोरेट जिस ढंग से काम करते हैं उस तरीके से आप दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को नहीं चला सकते।
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उन्होंने कहा कि किसी प्रधानमंत्री को कभी इस आधार पर नहीं आंका जाता कि वह कितने साल तक इस पद पर रहे, बल्कि इसका आधार उनके फैसले होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार में प्रधानमंत्री की बात आखिरी होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री को देश का स्वाभाविक नेता होना चाहिए। उन्हें कभी असहाय नहीं दिखना चाहिए। कभी यह अहसास नहीं होना चाहिए कि उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा है।
संप्रग के शासन के तरीके पर टिप्पणी करते हुए जेटली ने कहा कि आपने सामान्य सरकार से बाहर व्यवस्थाएं बना दी गई हैं। ये बाहरी व्यवस्थाएं उन निर्देशों के विरोध में हैं जो अर्थव्यवस्था के लिए दी जानी जरूरी हैं।
जेटली ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार नीतिगत पक्षाघात का शिकार है, जिससे विश्व भर में ब्रांड इंडिया की छवि धूमिल हुई है। इसके चलते निवेश का चक्र रुक ही नहीं, बल्कि उल्टा चलने लगा।
हाल के विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली बड़ी जीत के संदर्भ में उन्होंने दावा किया कि मतदाताओं ने एक वर्ग को लुभाने के लिए बनाई गई कुछ योजनाओं के लिए नहीं, बल्कि प्रभावशाली शासन के पक्ष में मतदान किया।