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...तो ननिहाल से पहला लोकसभा चुनाव लड़ेंगे जेटली

Sun, 16 Mar 2014 11:39 PM IST
Updated Sun, 16 Mar 2014 11:39 PM IST
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Arun jetli fight first lok sabha election from amritsar

पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ने जा रहे राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली को आखिरकार अपनी ननिहाल ही सबसे बेहतर व सुरक्षित सीट लगी।

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पंजाब के अमृतसर से तीन बार सांसद नवजोत सिंह सिद्धू को मनाने के लिए जेटली को उन्हें दोपहर के भोजन पर बुलाना पड़ा।

जेटली को भाजपा नई दिल्ली से चुनाव लड़ाने की सोच रही थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की शिकस्त याद कर जेटली यहां से ताल ठोकने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।
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यद्यपि जेटली ने अपनी राजनीति दिल्ली से शुरू की थी और वे दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष भी रहे थे, लेकिन वे राजधानी में अपना जनाधार तैयार नहीं कर पाए।
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लोकसभा चाहते थे जेटली

Arun jetli fight first lok sabha election from amritsar

दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश भाजपा जब मुख्यमंत्री का उम्मीदवार तलाश रही थी तो प्रदेश प्रभारी नितिन गडकरी चाहते थे कि जेटली अथवा सुषमा में किसी एक को आगे किया जाए, लेकिन दोनों ने राष्ट्रीय राजनीति में बने रहने की इच्छा जता दी।

बहरहाल, अमृतसर में भाजपा के स्थानीय नेता सिद्धू के खिलाफ थे और शिरोमणि अकाली दल के साथ सिद्धू की पटरी नहीं बैठ पा रही थी। हालांकि सिद्धू यह सीट को छोड़ने को तैयार नहीं थे, जबकि भाजपा उन्हें दिल्ली से चुनाव लड़ाना चाहती थी।

इस पर जेटली ने सिद्धू को लंच पर बुलाया और फिर सिद्धू ‘मान’ गए। उन्होंने जेटली को अपना गुरु भी बता दिया। दरअसल, जेटली इस बार हर हालत में लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे।

जेटली के अपने ख्वाब

Arun jetli fight first lok sabha election from amritsar
दरअसल, भाजपा में लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, सुषमा व जेटली जैस नेताओं को लग रहा है कि यदि नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री बनने में मुश्किल होती है तो उनकी भी लाटरी खुल सकती है।

इसलिए 1970 से राजनीति में सक्रिय जेटली ने भी लोकसभा चुनाव में ताल ठोकने का इरादा बना लिया। पंजाबी बिरादरी से होने के कारण उन्हें अमृतसर सीट सुरक्षित लगी। जेटली ने अपने ब्लॉग में अमृतसर और अपने संबंधों का जिक्र किया है।

उन्होंने लिखा कि उनकी मां अमृतसर से थी। उनका जन्म अमृतसर में ही हुआ है। उनकी पत्नी जम्मू की हैं।
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