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अभिनेत्री शबाना आजमी ने कहा पुरस्कार लौटाना ‘एक सांकेतिक भाव’

Mon, 02 Nov 2015 07:57 AM IST
Updated Mon, 02 Nov 2015 07:57 AM IST
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arun jaitley write facebook post about The Ease of Doing Business

बॉलीवुड अभिनेत्री शबाना आजमी में पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों और कलाकारों के समर्थन में उतर आई हैं। शबाना ने रविवार को कहा कि ‘बढ़ती असहिष्णुता’ के प्रति जागरूकता के लिए पुरस्कार लौटाना ‘सांकेतिक भाव’ है। 65 वर्षीय अभिनेत्री की यह प्रतिक्रिया एफटीआईआई छात्रों के समर्थन में शीर्ष फिल्मी हस्तियों की ओर से राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाने के बाद आई है।

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शबाना ने ट्विटर पर लिखा, ‘यह ऐसा और वैसा नहीं है। कलाकारों का पुरस्कार लौटाना उनकी कृतियों में भी दिखेगा लेकिन फिल्म बनाने और किताब लिखने में समय लगता है। पुरस्कार लौटाना ध्यान आकर्षित करने के लिए सांकेतिक भाव है।’ पिछले सप्ताह आनंद पटवर्धन, दिबाकर बनर्जी, परेश कामदर, निष्ठा जैन, कीर्ति नखवा, हर्षवर्धन कुलकर्णी, हरि नायर, राकेश शर्मा समेत दस फिल्मकारों ने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाया था।
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'जो नहीं चाहते हैं कि देश में कभी भी भाजपा की सत्ता रहे'

arun jaitley write facebook post about The Ease of Doing Business

इससे पहले देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली एक बार फिर से पीएम नरेंद्र मोदी के पक्ष में खुलकर आगे आते हुए विपक्ष के लोगों पर हमला बोला है। देश में बढ़ती असहिष्‍णुता पर बोलते हुए अरुण जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार लगातार देश की विकास दर को बढ़ाने के लिए काम कर रही है।

पर दूसरी तरफ देश में ऐसे लोग भी हैं, जो नहीं चाहते हैं कि देश में कभी भी भाजपा की सत्ता रहे। अरुण जेटली ने सीधे कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा के चिंतक और ‌एक्टिविक्ट को भी अपने निशाने पर ले लिया।

उन्होंने दावा किया कि ये वही लोग हैं जो भाजपा के प्रति वैचारिक असहिष्‍णुता को कई सालों से दर्शा रहे हैं।

The Ease of Doing BusinessThe World Bank has upped India’s ranking in the Ease of Doing Business by twelve positions....

Posted by Arun Jaitley on Sunday, 1 November 2015

'नरेंद्र मोदी खुद इसी वैचारिक असहिष्‍णुता से सबसे ज्यादा पीड़ित'

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दावा किया कि वर्ष 2002 के बाद नरेंद्र मोदी खुद इसी वैचारिक असहिष्‍णुता से सबसे ज्यादा पीड़ित रहने वाले व्यक्तियों में से एक हैं।

जेटली ने कहा कि लोगों ने पहले संसद नहीं चलते दी, उन्हें डर था कि अगर संसद में कई प्रस्ताव पास हो जाएंगे तो इसका श्रेय मोदी सरकार को चला जाएगा। बाद में उन्हीं लोगों ने देश में सामाजिक कलह का माहौल प्रचारित कर दिया।

उन्होंने कहा कि दादरी एक अचानक हो जाने वाली घटना थी। वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय काम था। दादरी में एक बेगुनाह की मौत के गुनाहगारों को सजा जरूर मिलेगी।

अरुण जेटली ने अपनी पार्टी के लोगों को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि देश में इस समय जरूरी हो गया है कि भारत के सभी लोग और मौजूदा सरकार सुनिश्चित करे कि ऐसा कोई बयान और काम न हो, जिससे देश की विकास रफ्तार रूक जाए।

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