अरुण जेटली की पाकिस्तान को खरी-खरी
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रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने पाकिस्तान को दो टूक कह दिया है कि उसे फैसला करना होगा कि वह भारत सरकार से बात करना चाहता है या फिर भारत को तोड़ने वाले लोगों का साथ देना चाहता है। उन्होंने कहा कि जब तक पड़ोसी मुल्क अपना रुख स्पष्ट नहीं करता है, तब तक उससे वार्ता संभव नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ बात करने और संबंध सुधारने को प्रतिबद्ध है, लेकिन कुछ सीमाएं होनी चाहिए। यहां आयोजित भारतीय आर्थिक शिखर सम्मेलन में जेटली ने कहा, "हमने माहौल तैयार किया था और विदेश सचिव स्तर की वार्ता तय की गई थी। हमारे विदेश सचिव पाकिस्तान जाने वाले थे, लेकिन कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने अलगाववादियों को बातचीत के लिए आमंत्रित कर दिया।"
उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि पाकिस्तान को कुछ चीजों पर स्पष्ट रेखा खींचनी होगी। वे आखिर किससे बात करना चाहते हैं? भारत सरकार से या उनसे जो भारत को तोड़ने की कोशिश में जुटे हुए हैं। इसलिए जब तक पाकिस्तान कोई स्पष्ट फैसला नहीं करता, तब तक पाकिस्तान से कोई वार्ता संभव नहीं हो सकती।"
उल्लेखनीय है कि इसी साल अगस्त में दोनों देशों के बीच विदेश सचिव स्तर की वार्ता होनी थी, लेकिन ठीक पहले पाकिस्तान ने कश्मीरी अलगाववादियों को बातचीत के आमंत्रित कर दिया। इसके बाद भारत ने वार्ता रद्द कर दी।
बिना स्पष्ट सोच के बातचीत नहीं: जेटली
एलओसी पर पाकिस्तान द्वारा सीजफायर के उल्लंघन का जिक्र करते हुए जेटली ने पाक को चेताया था कि उसे इस हिमाकत की बड़ी कीमत चुकानी होगी। जेटली ने पाकिस्तान को तीन संदेश दिए थे।
उन्होंने कहा, "पहली बात, हम बात करना चाहते थे, इसलिए हमने उन्हें आमंत्रित किया था। दूसरा, हमने अपने विदेश सचिव को वहां भेजा। लेकिन उन्हें फैसला करना होगा कि वे क्या चाहते हैं।"
जेटली ने तीसरी बात का जिक्र करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर इस तरह की स्थिति को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अभी वार्ता के लिए बिल्कुल भी अनुकूल माहौल नहीं है। भारत संबंधों को सामान्य करना चाहता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान भी ऐसा ही चाहता है।
सतत चलती रहेगी सुधार की प्रक्रिया: जेटली
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विदेशी निवेशकों से कहा है कि सरकार की सुधार प्रक्रिया किसी एक या दो निर्णय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है। इसके तहत कुछ महत्वपूर्ण फैसले हो चुके हैं जबकि आगे भी इस तरह के निर्णय होते रहेंगे।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा नई दिल्ली में आयोजित इंडिया इकोनॉमिक समिट के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को अभी एक लंबी यात्रा पूरी करनी है। यहां सरकार ने जो सुधार प्रक्रिया शुरू की है, वह कोई एक या दो फैसलों तक सीमित नहीं है। इसके तहत फैसलों का एक सिलसिला चलेगा और यह सतत चलता रहेगा। अर्थव्यवस्था की समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके समाधान के लिए कोई एक उपाय प्रभावी नहीं होगा बल्कि इसके लिए सब ओर से प्रयास करने होंगे।
पिछले कुछ महीने में शुरू किए गए सुधार कार्यों का जिक्र करते हुए जेटली ने कहा कि इस समय श्रम से संबंधित सुधार पर काम चल रहा है। ऐसा इसलिए ताकि यहां उद्योग और कारोबारी जगत के लिए मित्रवत माहौल बनाया जा सके। इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और भारत भी चीन जैसी आर्थिक महाशक्ति बन सकेगा। उन्होंने कहा कि कारोबारी माहौल बेहतर बनाने के लिए लालफीताशाही को भी दूर किया जा रहा है।
भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों पर भी आपत्ति
पिछले सरकार के कार्यकाल में पारित भूमि अधिग्रहण कानून के बारे में जब उनकी प्रतिक्रिया पूछी गई तो उन्होंने बताया कि सरकार का प्रयास उद्योग जगत की परेशानी दूर करना है। इस कानून में जो मुआवजा बढ़ाने की बात है, उस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन निजी क्षेत्र के उद्यमियों द्वारा स्थापित किए जाने वाले स्कूलों, होटलों और अस्पतालों के लिए सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण नहीं किए जाने के प्रावधान से वह अवश्य चिंतित हैं। यदि ऐसे प्रावधान बरकरार रहे तो देश में 100 नए स्मार्ट शहर बनाने में दिक्कत होगी।
सब्सिडी से संबंधित एक सवाल पर उन्होंने बताया कि भारत जैसे गरीब देश से सब्सिडी को खत्म करना संभव नहीं है। यहां अमीर गरीब सभी बेहतर जीवन व्यतीत कर सके, इसके लिए कुछ क्षेत्र में सब्सिडी आवश्यक है। हालांकि कुछ गैर जरूरी क्षेत्र में सब्सिडी हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और अन्य क्षेत्र में इसे युक्तिसंगत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार द्वारा अब तक उठाए गए कदमों पर उन्होंने संतोष जताते हुए कहा कि यह ठीक है और इसी को और आगे बढ़ाया जाएगा।