बदल गए दिन, कैग को ही नसीहत देने लगी मोदी सरकार
लोकसभा चुनावों में 2जी स्पेक्ट्रम और कोलब्लॉक घोटाले का नारे के रूप में इस्तेमाल कर सत्ता में आई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कैग ने ही नसीहत दे डाली।
जेटली ने कहा कि कैग को अपनी ऑडिट रिपोर्ट के जरिए सनसनी फैलाने या हैडलाइन बनने से बचना चाहिए। वित्त मंत्री के बयान को मोदी सरकार के बदले रवैये के बतौर देखा जा रहा है।
यूपीए सरकार के वक्त भाजपा ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन, कॉमनवेल्थ खेल और कोलब्लॉक आवंटन पर कैग की रिपोर्ट को लेकर काफी हंगामा किया था। कैग द्वारा बताए गए 'अनुमानित नुकसान' को आधार बनाकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का इस्तीफा भी मांगा। 2जी और कोल ब्लॉक पर कैग के आंकड़ों को लेकर कई बार संसद की कार्यवाही ठप की।
जेटली की नसीहत, हेडलाइन बनने से बचें
कैग के सालाना सम्मेलन में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कैग को तथ्यों के प्रति सतर्क रहना चाहिए क्योंकि वह पहले से लिए गए निर्णयों की समीक्षा कर होता है। उसे यह पता लगाना होता है कि क्या उचित प्रक्रियाओं का पालन किया गया। उसे सनसनी नहीं फैलानी चाहिए। उसे अपनी ऑडिट रिपोर्ट के जरिए हेडलाइन बनने से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक लेखा परीक्षक को सक्रिय लेखा परीक्षक होना चाहिए लेकिन सक्रियता और संयम हमेशा से एक ही सिक्के के दो पहलू रहे हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि लेखा परीक्षक फैसलागत प्रक्रिया की समीक्षा करते हैं और उन्हें किसी भी प्रक्रिया में भाई भतीजावाद को खत्म करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एक लेखा परीक्षक को गलत निर्णय और भ्रष्ट फैसले के बीच अंतर करने में सक्षम होना चाहिए।
कैग के आंकड़ों से हुई थी यूपीए सरकार की फजीहत
2जी स्पेक्ट्रम और कोल ब्लॉक का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि इसकी देश को भारी कीमत चुकानी पड़ी है क्योंकि सौदे रद्द कर दिए गए हैं और अब पावर सेक्टर को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
2जी स्पेक्ट्रम आवंटन और कोल ब्लॉक आवंटन पर कैग की रिपोर्ट को लेकर तत्कालीन यूपीए सरकार और कांग्रेस को काफी फजीहत झेलनी पड़ी थी।
उल्लेखनीय है कि जेटली से पहले सोमवार को लोकलेखा समिति के चेयरमैन और कांग्रेस नेता केवी थॉमस ने भी कैग को काल्पनिक नुकसान के खगोलीय आंकड़े पेश करने से बचने को कहा था।