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अनुच्छेद 370 पर आडवाणी उमर के बीच जुबानी जंग

Sat, 29 Jun 2013 03:45 AM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Sat, 29 Jun 2013 03:45 AM IST
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article 370 row advani hits back at omar abdullah
जम्मू-कूश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने या बरकरार रखे जाने को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और प्रदेश के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है।
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नेशनल कांफ्रेंस नेता द्वारा एक रैली में अपनी आलोचना किए जाने के बाद भाजपा के पितामह ने अपने ब्लॉग में उमर को छल और धोखे जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किए जाने की नसीहत दी है।
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वहीं दूसरी ओर आडवाणी के ब्लॉग के पलटवार में जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर लिखा है कि मुझे संयम बरतने की सलाह देने की बजाय आडवाणी जी को केंद्र में सत्ता में रहने के दौरान इस मसले पर अपनी चुप्पी पर सफाई देनी चाहिए।   
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अपने हालिया ब्लॉग में आडवाणी ने लिखा है कि भाजपा हमेशा से अनुच्छेद 370 का विरोध करती रही है।

जवाहर लाल नेहरू और कुछ नेताओं को छोड़कर कांग्रेस पार्टी भी जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिए जाने के सख्त खिलाफ थी।

उन्होंने सरदार बल्लभभाई पटेल की आत्मकथा का जिक्र करते हुए कहा कि वह भी अनुच्छेद 370 के खिलाफ थे लेकिन नेहरू की वजह से उन्होंने अपने विचारों को पीछे रखा।

उन्होंने आगे लिखा है कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को राज्य से संबंधित मामलों पर भाजपा से असहमत होने का पूरा हक है।

लेकिन मैं उन्हें सलाह दूंगा कि वह कभी भी आक्रामक भाषा और धोखा तथा छल जैसे शब्दों का प्रयोग न करें। आडवाणी ने हाल ही में राज्य से अनुच्छेद 370 को खत्म करने की वकालत की थी।

कश्मीर में आयोजित एक रैली में पीएम मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की मौजूदगी में उमर ने आडवाणी का नाम लिए बिना धारा 370 को खत्म करने का मुद्दा उछालने के लिए उनकी निंदा की थी।

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने जम्मू कश्मीर के संदर्भ में पार्टी के रुख के लिए धोखे जैसे शब्दों के इस्तेमाल को अत्यधिक अनुचित करार दिया है।

उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी 1951 में जनसंघ के अस्तित्व में आने के समय से अब तक न केवल स्पष्टवादी और अडिग रही है बल्कि उसके लिए यह एक ऐसा मामला है, जिसके लिए पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने प्राणों की आहुति भी दे दी।

आडवाणी द्वारा अपने ब्लॉग पर खुद को नसीहत दिए जाने के बाद उमर अब्दुल्ला ने एक बार फिर भाजपा के वरिष्ठ नेता पर हमला बोला है।

सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर उन्होंने लिखा है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता को 1998 से 2004 के बीच केंद्र में एनडीए की सरकार के दौरान अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने पर अपनी चुप्पी पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ने आगे लिखा है कि मुझे संयम बरतने की नसीहत देने की बजाय आडवाणी जी को कुछ ब्लॉग 1998-2004 के बीच अनुच्छेद 370 पर अपनी चुप्पी पर स्पष्टीकरण को देना चाहिए।


साथ ही अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद उनकी कौन से संवैधानिक प्रणाली का पालन करने की योजना है, के बारे में भी ब्लॉग लिखना चाहिए। जिससे मैं उनके विजन से कुछ सीख सकूंगा।
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