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आपत्तिजनक टिप्पणियों पर अब सीधे गिरफ्तारी नहीं
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Fri, 30 Nov 2012 01:25 AM IST
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सोशल नेटवर्किंग साइटों पर कथित ‘आपत्तिजनक’ टिप्पणियों के मामले में पुलिस अब सीधे गिरफ्तारी नहीं कर सकेगी। सरकार ने आईटी कानून की विवादित धारा 66ए के मामले में नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनके अनुसार अब ‘आपत्तिजनक’ टिप्पणी की शिकायत पर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में कम से कम डिप्टी पुलिस कमिश्नर (डीसीपी) रैंक के अधिकारी की इजाजत पर ही गिरफ्तारी हो सकेगी। वहीं महानगरों में पुलिस के इंस्पेक्टर जनरल (आईजीपी) द्वारा अनुमति देने के बाद ऐसे मामले में किसी को गिरफ्तार किया जा सकेगा।
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सूत्रों के अनुसार केवल ये वरिष्ठ अधिकारी ही सूचना और प्रौद्योगिकी (आईटी) कानून के तहत इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों द्वारा नफरत या अशांति फैलाने वालों की गिरफ्तारी को स्वीकृति दे सकेंगे। बीते कुछ महीनों में आईटी कानून की विवादास्पद धारा 66ए के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में आम आदमी की गिरफ्तारी को लेकर लोगों में गुस्सा देखा गया है।
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उल्लेखनीय है कि देश में 12.5 करोड़ से ज्यादा इंटरनेट यूजर्स हैं और इनमें से करीब आधे विभिन्न सोशल नेटवर्किंग साइटों से जुड़े हैं। ऐसे में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कई बार आईटी कानूनों पर सफाई देते भी नजर आए हैं, लेकिन लोगों की नाराजगी के बाद आखिरकार सरकार ने गिरफ्तारियों के विरुद्ध कदम उठाया है।
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मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया, ‘अब कोई पुलिस स्टेशन या उसका संबद्ध पुलिस अधिकारी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में डीसीपी तथा महानगरों में आईजीपी रैंक के अधिकारी की अनुमति के बिना (धारा 66ए) के तहत मामला नहीं दर्ज कर सकेगा।’ अभी तक ‘आपत्तिजनक’ टिप्पणियों की शिकायत पर पुलिस थाने का इंचार्ज या इंस्पेक्टर शिकायत दर्ज कर सकता था।
मुंबई में बीते दिनों फेसबुक पर की गई टिप्पणियों के बाद दो युवतियों की गिरफ्तारी पर उठे विवाद ने सरकार को इस कानून पर नए सिरे से सोचने को मजबूर किया है। सरकार को विश्वास है कि नए दिशा-निर्देशों के बाद में ऐसी घटनाएं कम हो जाएंगी। सूत्र ने बताया, ‘संबद्ध मंत्रालय सभी राज्यों को नए दिशा-निर्देश भेज दिए हैं।’ अभी तक सरकार कहती रही है कि आईटी कानून की गलत व्याख्याएं की जा रही है, इसलिए विवाद पैदा हो रहे हैं।
सूत्र ने कहा कि फिलहाल आईटी कानून में कोई संशोधन नहीं किया जा रहा है। यह अधिकार सिर्फ संसद के पास है। ऐसे में सरकार नए दिशा-निर्देश ही जारी कर सकती है। धारा 66ए जमानती है, लेकिन इसमें दोषी साबित होने पर तीन साल तक जेल की सजा हो सकती है।
सिब्बल मिले सिविल सोसायटी से
संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने बृहस्पतिवार को सिविल सोसायटी के सदस्यों से मुलाकात की और आईटी कानून की विभिन्न धाराओं पर चर्चा की। सिविल सोसायटी लगातार कह रही है कि आई कानून में ऐसे प्रावधान हैं जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन करते हैं। सिब्बल ने विश्वास दिलाया कि इस मामले में वह सिविल सोसायटी के संपर्क में रहेंगे और सरकार उनकी चिंताओं को समझने का प्रयास करेगी।
पहले
पुलिस थाने का इंचार्ज या इंस्पेक्टर दर्ज कर सकता था शिकायत और गिरफ्तारी।
अब
ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में डीजीपी और मेट्रो में आईजीपी की इजाजत के बाद होगा मामला दर्ज।
आंकड़े
- 12.5 करोड़ इंटरनेट यूजर्स भारत में
- 10 करोड़ से ज्यादा भारतीय गूगल यूज करते हैं
- 5 करोड़ से ज्यादा फेसबुक यूजर्स
- 7वां नंबर भारत का, सोशल नेटवर्किंग करने वाले देशों की सूची में
- 50 लाख के करीब ट्वीट हर दिन करते हैं देश के यूजर्स