{"_id":"ed8f2dfe-3993-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"arrest-of-editors-is-illegal-sadi-zeenews","type":"story","status":"publish","title_hn":"जी न्यूज ने कहा, संपादकों की गिरफ्तारी गैरकानूनी","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
जी न्यूज ने कहा, संपादकों की गिरफ्तारी गैरकानूनी
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Thu, 29 Nov 2012 01:13 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जी न्यूज ने वसूली के प्रयासों के आरोप में अपने संपादकों सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया की गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए फौरन रिहाई की मांग की है। बुधवार को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जी ग्रुप ने इस गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया। दोनों को दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार किया था।
विज्ञापन
जी समूह के सीईओ आलोक अग्रवाल ने कहा कि वे गिरफ्तारी की निंदा करते हैं। कैग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदल व उनकी कंपनी जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड कोल आवंटन घोटाले में मुख्य आरोपी हैं। कुल कोयला ब्लॉक के 25 फीसदी का आवंटन जिंदल की कंपनी को किया गया। इससे सरकारी खजाने को 45 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सच यह है कि जिंदल ने घूस की पेशकश की थी और उसके बाद दबाव बनाना शुरू कर दिया। खबरें रोकने के लिए दिग्विजय सिंह, अर्जुन मुंडा व रमन सिंह के जरिए भी दबाव डलवाया गया। कोलगेट संबंधी खबरें रुकवाने के लिए जिंदल की मां सावित्री जिंदल की जी न्यूज के प्रमोटर जवाहर गोयल के साथ मुलाकात का भी जिक्र किया गया। इस दौरान सावित्री ने चार पीढ़ी पुराने पारिवारिक रिश्तों का हवाला देते हुए भावनात्मक दबाव डाला था। जी न्यूज ने इसके बाद कोलगेट संबंधी खबरों का प्रसारण रोककर जिंदल ग्रुप से उनका पक्ष जानना चाहा था। पक्ष जाहिर करने के बजाय मुकदमा दर्ज करवा दिया गया।
विज्ञापन
वहीं, जी के वकील आरके हांडू ने कहा कि जब चैनल ने कैग की रिपोर्ट पर फोकस किया तो जिंदल ग्रुप ने खबर रोकने के लिए उगाही का आरोप लगाते हुए हमला शुरू कर दिया। पैसे का लेनदेन नहीं हुआ तो इसे रंगदारी कैसे कह सकते हैं। पुलिस की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए हांडू ने कहा कि जब एफआईआर दो अक्तूबर को दर्ज हुई तो गिरफ्तारी करीब दो माह बाद 27 नवंबर को क्यों की गई।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस मामले में रंगदारी की धारा में एफआईआर दर्ज की है। जबकि यह मामला केवल रंगदारी की कोशिश में दर्ज होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया क्योंकि जमानती धारा है। जिंदल ग्रुप की सीडी पर सवाल उठाते हुए हांडू ने कहा कि जी न्यूज के संपादकों और जिंदल ग्रुप के अधिकारियों के बीच 5-6 घंटे की बातचीत हुई। इस बातचीत को 15 मिनट की अवधि में समेटकर पेश किया गया। इस सीडी पर सीएफएसएल की रिपोर्ट अंतिम सबूत नहीं है।
'सच यह है कि जिंदल ने घूस की पेशकश की थी और उसके बाद दबाव बनाना शुरू कर दिया। खबरें रोकने के लिए दिग्विजय सिंह, अर्जुन मुंडा व रमन सिंह के जरिए भी दबाव डलवाया गया।'
- आलोक अग्रवाल, जी समूह के सीईओ