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सेना ने की थी गणतंत्र दिवस परेड रद्द करने की सिफारिश

Mon, 30 Jun 2014 02:22 PM IST
एजेंसी/दिल्ली
एजेंसी/दिल्ली Updated Mon, 30 Jun 2014 02:22 PM IST
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army wanted to close the republic day parade

पाकिस्तान के खिलाफ 1971 में जंग जीतने के बाद सेना मुख्यालय ने 1972 की गणतंत्र दिवस परेड को रद करने की सिफारिश की थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इससे मानने से इनकार दिया।

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वह चाहती थीं कि भारतीय सेना की जबरदस्त सफलता का जश्न पूरे जोश के साथ मनाया जाए।

कुछ ऐसे ही तथ्यों का खुलासा सेना के करिश्माई अधिकारी ‘फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ : द मैन एंड हिज टाइम’ पर लिखी गई किताब में किया गया है।

किताब में हुए ऐतिहासिक खुलासे

army wanted to close the republic day parade

यह किताब उनके साथ लंबे समय तक काम करने वाले ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) बेहराम पंथकी और उनकी पत्नी जेनोबिया ने लिखी है। किताब में लिखा गया है, ‘1971 की जंग में जीत के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल था।

सेना ने खुद को साबित कर दिया था और 1962 में चीन के खिलाफ मिली शिकस्त का भूत पीछे छूट गया था। यूनिटें अभी भी आगे बढ़ रही थीं, इसलिए सेना मुख्यालय ने गणतंत्र दिवस को रद करने की सिफारिश की थी।

मगर तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी इस प्रतिष्ठित समारोह को आयोजित कराना चाहती थीं। यह जीत का जश्न था और शहीदों को श्रद्धांजलि थी।’ आदेश के बाद सीपीडब्ल्यूडी ने तुरंत ही इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति की स्थापना की।

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एयर चीफ मार्शल ने किया था विरोध

army wanted to close the republic day parade

सैम मानेकशॉ ने अपनी किताब में लिखा है, ‘26 जनवरी, 1972 को परेड की शुरुआत से पहले, इंदिरा गांधी तीनों सेना प्रमुखों के साथ खुली जीप में आईं और अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

इसके बाद परेड की शुरुआत हुई। जवानों ने औपचारिक वर्दी की बजाय जंग में पहनी जाने वाली वर्दी में ही परेड में भाग लिया।’ लेखक ने यह भी खुलासा किया कि इंदिरा गांधी गणतंत्र दिवस के मौके पर मानेकशॉ को तीनों सेनाओं का प्रमुख घोषित करने पर गंभीरता से विचार कर रही थीं।

लेकिन रक्षा मंत्री जगजीवन राम के नेतृत्व में कांग्रेसी नेताओं और तत्कालीन एयर चीफ मार्शल पीसी लाल ने इसका विरोध किया। नियोगी द्वारा प्रकाशित इस किताब में मानेकशॉ की तस्वीरों के अलावा काफी सारी जानsकारी दी गई है।

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