सेना ने मौलवी को जय हिंद बोलने से रोका?
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थल सेना के एक मौलवी के दावे से विवाद पैदा हो गया है। मौलवी ने दावा किया है कि उन्हें अभिवादन में ‘राम-राम’ और ‘जय माता दी’ की जगह ‘जय हिंद’ बोलने से रोका गया। हालांकि सेना ने मौलवी के दावे को बकवास करार दिया है।
तीन राजपूताना राइफल्स के सूबेदार इशरत अली ने राष्ट्रपति और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि उनके कमांडिंग ऑफिसर ने बटालियन के अभिवादन के आधिकारिक शब्द ‘राम-राम’ और ‘जय माता दी’ की जगह ‘जय हिंद’ के इस्तेमाल पर नोटिस दिया है।
उन्होंने पत्र की प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी भेजी है। अली ने ‘राम-राम’ और ‘जय माता दी’ को हिंदू धार्मिक शब्द करार देते हुए कहा है कि एक मुस्लिम धर्मगुरु होने के कारण उनके लिए इसका इस्तेमाल करना मुश्किल है।
राष्ट्रपति और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को लिखा पत्र
सेना मुख्यालय ने कहा कि ‘राम-राम’ और ‘जय माता दी’ का इस्तेमाल नहीं करने के कारण मौलवी को नोटिस थमाया गया है।
सैन्य अधिकारियों ने बताया कि तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने वर्ष 2012 में एक सर्कुलर जारी किया था जिसके मुताबिक जय हिंद का इस्तेमाल जवानों को आपस में अभिवाद करने के लिए करने की बात कही गई थी, लेकिन इसमें रेजीमेंटों की अभिवादन की परंपरा को जारी रखने को कहा गया था।
3 राजपूताना राइफल्स में 50 फीसदी जाट और 25-25 फीसदी मुस्लिम और राजपूत जवान होते हैं और हर कोई ‘राम-राम’ और ‘जय माता की’ का इस्तेमाल करता है।
सैन्य अधिकारियों ने बताया कि मौलवी से कहा गया था कि एक धर्मगुरु होने के नाते उनका काम जवानों को उत्साहित करना है लेकिन यूनिट के अभिनंदन के तरीके का विरोध करना उनकी संकुचित मानसिकता को दिखाता है।