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ब्रह्मपुत्र की लहरों पर सवार हुई सेना
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Thu, 30 May 2013 08:42 PM IST
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गुपचुप तरीके से सेना ने पूर्वी कमान में सैनिकों और सैन्य साजोसामान को कम समय में गंतव्य तक पहुंचाने के लिए चार दशक बाद ब्रह्मपुत्र के जलमार्गों का फिर से उपयोग शुरू कर दिया है।
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सेना सूत्रों ने असम के बडे़ भूभाग से गुजरने वाली विशाल नदी को अपनी रसद आपूर्ति का मुख्य साधन बनाए जाने की पुष्टि की है।
सूत्रों ने कहा कि ब्रह्मपुत्र के जलमार्गों का सैन्य साजोसामान की आपूर्ति के लिए इस्तेमाल शुरू हो गया है। अभी यह परिवहन प्रायोगिक आधार पर हो रहा है और आने वाले समय में अनुभवों के आधार पर इसका व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा।
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पूर्वी कमान के एक बड़े इलाके में ब्रह्मपुत्र का आंचल फैला है और सेना की अनेक यूनिटें इस नदी से जुड़ी हैं। इन यूनिटों तक साजोसामान की आपूर्ति नदी मार्ग से बेहद सुगम हो जाएगी।
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भारतीय सेना ने ब्रह्मपुत्र के जलमार्गों का उपयोग पाकिस्तान के खिलाफ 1971 की जंग में बड़े पैमाने पर किया था और उस समय सेना की इंटीग्रेटेड वाटर ट्रांसपोर्ट (आईडब्ल्यूटी) बहुत कारगर साबित हुई थी। सेना के सूत्रों के अनुसार उसी पूरे तंत्र को फिर से सक्रिय किया गया है।
जनरल बिक्रम सिंह सेना प्रमुख के पद पर आने से पहले सेना की पूर्वी कमान को ही संभाल रहे थे और उन्होंने बहुत नजदीकी से इस कमान में सैनिकों और साजोसामान की तैनाती के तौर तरीके को देखा था।
सेना की बागडोर संभालने के बाद उन्होंने पूर्वी कमान में सैन्य परिवहन की तस्वीर बदलने का बीड़ा उठाया और ब्रह्मपुत्र के जलमार्गों को परिवहन प्रणाली की रीढ़ बनाने का संकल्प लिया।
सूत्रों ने अनुमान व्यक्त किया है कि टकराव की किसी भी स्थिति में ब्रह्मपुत्र के जलमार्ग बहुत कारगर भूमिका निभाएंगे और सैन्य साजोसामान की तैनाती में 40 प्रतिशत तक के समय की बचत हो सकेगी।