सेना ने माना, सैनिकों के जीवित मिलने की संभावना कम
कश्मीर के सियाचिन में हिमस्खलन की चपेट में आकर लापता हुए सेना के दस जवानों के मिलने की उम्मीद अब धूमिल होती दिख रही है। सेना और वायुसेना की कई टीमें जवानों की तलाश में लगी थीं। दो दिन की तलाश के बाद सेना ने भी मान लिया है कि अब जवानों का जीवित बचना मुश्किल है।
हालांकि हादसे के दूसरे दिन भी सेना-वायुसेना जवानों की तलाश में जुटी है। इसके लिए खास उपकरण गुरुवार सुबह विशेष विमान से लेह भी भेजे गए हैं, जिनसे लापता हुए जवानों की तलाश की जा रही है।
इस बीच सेना के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा है कि, "गहरे अफसोस के साथ कहना चाहूंगा कि हमें किसी के भी जीवित होने की संभावना दूर तक नहीं दिखती।" हालांकि अभी सेना ने अपना अभियान खत्म नहीं किया है लेकिन सेना के बयान से यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि हिमस्खलन की चपेट में आए जवानों के वापस लौटने की उम्मीद कम ही दिखती है।
With deepest regret we have to state that chances of finding any survivors are very remote: Defence Spox, MoD pic.twitter.com/Qd0pajMoxY
— ANI (@ANI_news) February 4, 2016
जनवरी में भी लापता हो गए थे चार जवान
बता दें कि बुधवार को नियमित पेट्रोलिंग के दौरान सियाचिन में हिमस्खलन के कारण उसकी चपेट में आकर सेना के दस जवान लापता हो गए थे। जिसके बाद तत्काल सेना ने उनकी तलाश शुरू कर दी थी।
सेना के प्रवक्ता कर्नल एसडी गोस्वामी ने बताया कि घटना उस समय हुई जब सेना के जवान पेट्रोलिंग पर निकले थे, तभी 19 हजार फुट की ऊंचाई पर उत्तरी सियाचिन में बर्फ का एक ग्लेशियर टूटकर नीचे आ गिरा। इस दौरान पेट्रोलिंग पर निकले जवान उसकी चपेट में आ गए।
बता दें कि जिस जगह यह हादसा हुआ वहां ग्लेशियरों का टूटकर गिरना आम बात है। सर्दियों में यहां तापमान शून्य से 60 डिग्री नीचे तक चला जाता है। जनवरी में ही अभी तक चार जवान हिमस्खन की चपेट में आकर अपनी जान गवां चुके हैं। जबकि बीते साल भी चार जवान उस समय मौत के मुंह में चले गए थे जब लेह के नजदीक उनका वाहन भूस्खलन की चपेट में आ गया था।