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सेना ने माना, सैनिकों के जीवित मिलने की संभावना कम

Thu, 04 Feb 2016 08:02 PM IST
Updated Thu, 04 Feb 2016 08:02 PM IST
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Army considered that Soldiers not expected to survive

कश्मीर के सियाचिन में हिमस्खलन की चपेट में आकर लापता हुए सेना के दस जवानों के मिलने की उम्मीद अब धूमिल होती दिख रही है। सेना और वायुसेना की कई टीमें जवानों की तलाश में लगी थीं। दो दिन की तलाश के बाद सेना ने भी मान लिया है कि अब जवानों का जीवित बचना मुश्किल है।

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हालांकि हादसे के दूसरे दिन भी सेना-वायुसेना जवानों की तलाश में जुटी है। इसके लिए खास उपकरण गुरुवार सुबह विशेष विमान से लेह भी भेजे गए हैं, जिनसे लापता हुए जवानों की तलाश की जा रही है।
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इस बीच सेना के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा है कि, "गहरे अफसोस के साथ कहना चाहूंगा कि हमें किसी के भी जीवित होने की संभावना दूर तक नहीं दिखती।" हालांकि अभी सेना ने अपना अभियान खत्म नहीं किया है लेकिन सेना के बयान से यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि हिमस्खलन की चपेट में आए जवानों के वापस लौटने की उम्मीद कम ही दिखती है।
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जनवरी में भी लापता हो गए थे चार जवान

Army considered that Soldiers not expected to survive

बता दें कि बुधवार को नियमित पेट्रोलिंग के दौरान सियाचिन में हिमस्‍खलन के कारण उसकी चपेट में आकर सेना के दस जवान लापता हो गए थे। जिसके बाद तत्काल सेना ने उनकी तलाश शुरू कर दी थी।

सेना के प्रवक्ता कर्नल एसडी गोस्वामी ने बताया कि घटना उस समय हुई जब सेना के जवान पेट्रोलिंग पर निकले थे, तभी 19 हजार फुट की ऊंचाई पर उत्तरी सियाचिन में बर्फ का एक ग्लेशियर टूटकर नीचे आ गिरा। इस दौरान पेट्रोलिंग पर निकले जवान उसकी चपेट में आ गए।

बता दें कि जिस जगह यह हादसा हुआ वहां ग्लेशियरों का टूटकर गिरना आम बात है। सर्दियों में यहां तापमान शून्य से 60 डिग्री नीचे तक चला जाता है। जनवरी में ही अभी तक चार जवान हिमस्‍खन की चपेट में आकर अपनी जान गवां चुके हैं। जबकि बीते साल भी चार जवान उस समय मौत के मुंह में चले गए थे जब लेह के नजदीक उनका वाहन भूस्‍खलन की चपेट में आ गया था।

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