यूपी की बेटी ने बताया, कैसे बनीं SSB की महानिदेशक
पुलिस की भूमिका निभाने में महिला और पुरुष का फर्क मायने नहीं रखता। हालांकि, आम धारणा यही है कि महिला पुलिस जैसी मुश्किल जिम्मेदारियों को बखूबी नहीं निभा सकतीं। लेकिन मुझे आईपीएस इम्तिहान पास कर 35 साल तक काम करते हुए सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के शीर्ष पद तक पहुंचने में कोई खास दिक्कत नहीं हुई।
यह कहना है किसी अर्धसैनिक बल की पहली महानिदेशक बनी अर्चना रामसुंदरम का। अमर उजाला से बातचीत में रामसुंदरम ने कहा कि वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश की बलिया की रहने वाली हैं।
उनके पिता जयपुर में न्यायिक सेवा में कार्यरत थे। अर्चना के मुताबिक अगर वह एक साधारण परिवार से उठकर पुलिस के शीर्ष पद तक पहुंच सकती हैं तो कोई भी लड़की यह काम कर सकती है।
सभी क्षेत्रों में बढ़े महिलाओं की भागेदारी
अर्चना का मानना है कि यह एक सच्चाई है कि वह इस स्तर तक पहुंचने वाली पहली
महिला अधिकारी हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सिर्फ महिला होने के नाते
वह इस स्तर तक पहुंची हैं।
इसके लिए वह पूरे कैरियर में कठिन समय से भी
गुजरी हैं। उनके पति तमिलनाडु से हैं और उसी कैडर में आईएसएस अधिकारी रहे
हैं। रामसुंदरम 1980 बैच की केरल कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं।
उन्होंने कहा
कि अब हरेक स्तर पर आम राय है कि सभी क्षेत्रों में महिलाओं की भागेदारी
बढ़े। यह युवा लड़कियों के आगे आने का सुनहरा दौर है।
उन्हें उनके पिता ने
आईपीएस बनने के लिए खूब प्रोत्साहित किया था। अपने पुश्तैनी शहर बलिया का
जिक्र करते हुए रामसुंदरम के कहा कि वहां की आज की लड़कियों को देख कर लगता
है कि उन्हें भी कैरियर के सभी विकल्प आजमाने का पूरा मौका मिलना चाहिए।