अवैध धन पर अंकुश लगाने वाले बिल को मंजूरी
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विधेयक को राज्यसभा ने सोमवार को ध्वनि मत से मंजूरी दे दी जबकि लोकसभा में इसे पहले ही पारित किया जा चुका है। विधेयक में अवैध संपत्ति अर्जित करने वालों तथा इस काम में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से सहयोग करने वालों को दंडित करने का प्रावधान है। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि धन शोधन तकनीकी रूप से परिभाषित एक विशिष्ट किस्म का अपराध है, जो मुख्य रूप से आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय मंच फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने आतंकवादी संगठनों के आर्थिक संसाधनों पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कानून बनाने का सुझाव दिया था, जिसके तहत विभिन्न सदस्य देशों ने एक जैसे कानून बनाए हैं। कानून के दुरुपयोग की आशंका के बारे में चिदंबरम ने कहा कि धन शोधन निवारण कानून में भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुरूप ही व्यवस्था की गई है।
धन शोधन निवारण कानून सूचीबद्ध अपराधों से जनित धन संग्रह पर ही लागू होगा। कानून में यह व्यवस्था है कि यदि मूल अपराध में कोई व्यक्ति बरी हो जाए तो भी उसे अपनी संदिग्ध धनराशि एवं संपत्ति के बारे में सफाई देनी होगी। अवैध धनराशि की सीमा को हटा दिया गया है तथा अब 30 लाख रुपये से कम की धनराशि पर भी यह कानून लागू होगा।