सब इंस्पेक्टरों की नियुक्ति का रास्ता साफ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सब इंस्पेक्टरों की नियुक्ति मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। सर्वोच्च अदालत ने दो हजार से अधिक सब इंस्पेक्टरों की नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया।
परीक्षा देने वाले हजारों अभ्यर्थियों की गुहार पर अदालत ने उत्तर प्रदेश पुलिस नियुक्ति एवं पदोन्नति बोर्ड को मेरिट सूची तैयार करने का आदेश दिया है।
साथ ही सरकार को भर्ती प्रक्रिया को तीन माह में पूरा कर नियुक्तियां करने को कहा है। गत वर्ष अदालत ने 3,223 सब इंस्पेक्टरों को राज्य में तैनात किए जाने के मसले पर अपनी मंजूरी दी थी।
एक दशक से लटकी थी सब इंस्पेक्टरों की भर्ती
जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अभ्यर्थी अनिल कुमार व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर चयन बोर्ड और राज्य सरकार को तीन माह में दो हजार से भी अधिक पदों पर नियुक्ति करने का आदेश जारी किया।
राज्य में सब इंस्पेक्टरों की भर्ती का रास्ता बीते एक दशक से कानूनी विवाद के बाद ही खुला है, जिसमें गत वर्ष शीर्षस्थ अदालत की ओर से विभागीय परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले कांस्टेबलों को सब इंस्पेक्टरों के तौर पर तैनात किए जाने का मुद्दा भी अहम था।
उस समय सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए कहा था कि भला सफल अभ्यर्थियों की पोस्टिंग पर रोक कैसे लगाई जा सकती है। जबकि इस मामले में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति में प्रश्न पत्र में शामील 18 गलत प्रश्न रोड़ा बन गए थे।
बड़ी संख्या में सब इंस्पेक्टरों के पद खाली
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रश्न पत्र में गलत सवालों के लिए अभ्यर्थियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, इसलिए जिन अभ्यर्थियों ने यदि सभी गलत प्रश्नों के उत्तर दिए हों तो उन्हें पूरे अंक दिए जाएं। जबकि जिन्होंने कम प्रश्नों के उत्तर दिए हों, उन्हें उस हिसाब से अंक दिए जाएं।
राज्य चयन बोर्ड इसके मुताबिक मेरिट सूची तैयार करे और राज्य सरकार तीन माह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया को अंजाम दे। पीठ के समक्ष राज्य की ओर से अधिवक्ता रवि प्रकाश मेहरोत्रा ने कहा कि बड़ी संख्या में सब इंस्पेक्टरों के पद खाली हैं।
ऐसे में हाईकोर्ट की ओर से सवालों के गलत होने की स्थिति में संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई। जबकि इसमें अभ्यर्थियों का दोष नहीं माना जा सकता। पीठ ने अधिवक्ता के तर्क से सहमति जताई।
गौरतलब है कि राज्य में 18,996 पद सब इंस्पेक्टर के हैं। गत वर्ष तक इन पदों पर सिर्फ 6,063 सेवाएं दे रहे थे, लेकिन अक्तूबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 3229 सफल अभ्यर्थियों को सरकार ने तैनात किया। अब दो हजार से ज्यादा पदों पर नियुक्तियां होने से खाली पड़े करीब दस हजार पदों में कमी आएगी।