मनमोहन को गवाह तलब करने संबंधी आवेदन खारिज
अदालत ने कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले से जुड़े एक मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बतौर गवाह पेश होने का निर्देश देने से इनकार कर दिया।
झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड (जेआईपीएल) के निदेशक आरएस रूंगटा ने आवेदन दायर कर यह आग्रह किया था। अदालत इससे पहले उनके पूर्व कोयला राज्य मंत्री दसारी नारायण राव को भी गवाह के रूप में तलब करने संबंधी आवेदन को खारिज कर चुकी है।
पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई न्यायाधीश भरत पाराशर ने अपने आदेश में कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि हर आरोपी को अपने बचाव के लिए पसंद का गवाह व सबूत पेश करने का अधिकार है। अदालत ने कहा कि इस अधिकार का प्रयोग सुनवाई में देरी के लिए नहीं किया जा सकता।
ये है पूरा मामला
रूंगटा ने याचिका में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस मामले में
बचाव पक्ष के गवाह के रूप में तलब करने का आग्रह किया था। उन्होंने अदालत
से पिछले साल 23 दिसंबर के आदेश में संशोधन का अनुरोध किया था।
न्यायाधीश
भरत पाराशर ने अपने आदेश में कहा कि रूंगटा की यह दलील तथ्यात्मक रूप से
गलत है कि अदालत ने उनकी निर्दोषता साबित करने के लिए अपनी पसंद के गवाह और
दस्तावेज को आधिकारिक रूप से पेश करने का आग्रह खारिज कर दिया।
अदालत
ने कहा कि इन परिस्थितियों में 23 दिसंबर 2015 के आदेश में संशोधन के लिए
वर्तमान आवेदन के जरिये किया गया अनुरोध तर्क संगत व टिकाऊ नहीं है। इसी
तरह से आवेदन दायर कर आदेश संशोधित करने का कोई आधार नहीं है।
अदालत ने कहा
कि आरोपी ने जिन रिकॉर्ड को तलब करने का अनुरोध किया है उन्हें पिछले साल
के आदेश में आधिकारिक रूप से पेश करने की अनुमति दी जा चुकी है।
जेआईपीएल
और इसके दो निदेशक आरएस रूंगटा और आरसी रूंगटा कथित रूप से झूठे और फर्जी
दस्तावेज के आधार पर फर्म को झारखंड में नॉर्थ धाडू कोयला ब्लॉक आवंटित
करने से जुड़े मामले में सुनवाई का सामना कर रहे हैं।