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आए दिन सड़कें न तोड़ी जाएं, सुप्रीम कोर्ट से गुहार

Sun, 17 Jan 2016 06:16 AM IST
Updated Sun, 17 Jan 2016 06:16 AM IST
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appeal to Supreme Court, Roads were not broken

सड़कें बनाना और उसकेबाद समय-समय पर विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा विकास कार्य केनाम पर सड़क की खुदाई और फिर उसका पुनर्निर्माण। यह कहानी सिर्फ किसी एक शहर तक ही सीमित नहीं है बल्कि पूरे देश में यही हाल है।

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सरकारी एजेंसियों में आपस में तालमेल नहीं होने के कारण सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट में इस मसले को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी।रोशन चपागेन द्वारा दाखिल इस याचिका में कहा गया है कि विकास कार्य केनाम पर सरकारी एजेंसी बनाती कम हैं और बिगाड़ती ज्यादा हैं।
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सड़कें बनाई जाती है लेकिन कभी पीएनजी पाइपलाइन केनाम पर तो कभी ऑप्टिकल फाइबर लाइन बिछाने या मरम्मत केनाम पर, कभी पानी की पाइप लाइन बिछाने या मरम्मत के नाम पर सड़कें तोड़ी जाती हैं। एक सरकारी एजेंसी का काम खत्म होता है तो दूसरी एजेंसी अपना काम शुरू कर देती है।
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कभी पानी तो कभी की पाइपलाइन के लिए तोड़ी जाती हैं सड़कें

appeal to Supreme Court, Roads were not broken

याचिका में कहा गया कि सड़कों पर गड्ढे होने के कारण हजारों दुर्घटनाएं होती है और लोगों की जान जाती है। सड़कों पर गड्डों और निर्माण कार्य की वजह से वजह से वर्ष 2014 में करीब 11000 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा था।

इनमें उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक लोगों की जानें गईं। याचिका में सड़कों की बार-बार खुदाई से बचने के लिए यूटिलिटि कॉरिडोर बनाने की गुहार की गई है जिससे कि सड़कों को नुकसान न हो।

याचिका में यह भी कहा गया कि इसकेलिए सड़कों पर इंटरलॉकिंग ब्लॉक की व्यवस्था होनी चाहिए जिससे कि काम केवक्त उसे हटा कर रख दिया जाए और काम खत्म होने के बाद उसे वापस उसी जगह पर रख दिया जाए और इससे बनी सड़कों की लाइफ पांच सौ साल होती है।

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