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खत्म होगी एपीएल और बीपीएल कार्ड की होड़

Thu, 14 Feb 2013 08:59 PM IST
नई दिल्ली/अजीत सिंह
नई दिल्ली/अजीत सिंह Updated Thu, 14 Feb 2013 08:59 PM IST
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apl and bpl card race will be finish

रियायती दर पर पीडीएस से राशन लेने के लिए बीपीएल और एपीएल कार्ड बनवाने की होड़ अब खत्म हो सकती है। इसके बजाय सरकार उन लोगों की पहचान करेगी, जिन्हें रियायती दर पर राशन नहीं मिलना चाहिए। संशोधित खाद्य सुरक्षा विधेयक में 33 फीसदी लोग इस श्रेणी में आ सकते हैं। लाभार्थियों के वर्गीकरण ने कर सिर्फ एक श्रेणी रखने के सुझाव पर अधिकांश राज्य सहमत हो सकते हैं।

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संसद की स्थायी समिति ने वर्गीकरण किए बगैर 75 फीसदी ग्रामीण और 50 फीसदी शहरी आबादी को लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के दायरे में लाने की सिफारिश की है। इस तरह देश की करीब 67 फीसदी आबादी को सस्ता अनाज मिल सकता है।
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बजट सत्र में पेश होने वाले संशोधित विधेयक में इस सुझाव के शामिल होने के पूरे आसार बन रहे हैं। इससे उन राज्यों को फायदा होगा जहां बीपीएल परिवारों की संख्या कम है। गौरतलब है कि फिलहाल केंद्र सरकार राज्यों को बीपीएल आबादी के हिसाब से पीडीएस के अनाज का आवंटन करती है, जो कुल आबादी का करीब 37 फीसदी है।
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विधेयक पर राज्यों के खाद्य मंत्रियों के साथ रायशुमारी के बाद केंद्रीय खाद्य मंत्री केवी थॉमस ने कहा है कि राज्यों का मौजूदा आवंटन किसी भी सूरत में नहीं घटने दिया जाएगा। अगर 67 फीसदी की सीमा के चलते उनका आवंटन घटता है तो सरकार उसकी भरपाई करेगी।

थॉमस का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 75 और शहरी में 50 फीसदी आबादी को लक्षित पीडीएस के दायरे में लाकर कुल 67 फीसदी आबादी को कवर करने के सुझाव पर राज्यों के साथ काफी विचार-विमर्श हुआ है। राष्ट्रीय स्तर पर तय इस सीमा को कायम रखते हुए सरकार राज्यों के आधार पर लाभार्थियों की पहचान करने को तैयार है।

थॉमस का कहना है कि हर महीने प्रति व्यक्ति 7 के बजाय 5 किलो अनाज देने के मुद्दे पर ज्यादातर राज्य सहमत हैं। गौरतलब है कि तमिलनाडु ने इस विधेयक को सिरे से खारिज कर दिया है, जबकि यूपी, बिहार और छत्तीसगढ़ को कुछ प्रावधानों पर आपत्ति हैं।


फूड सब्सिडी पर पड़ेगा 20 हजार करोड़ का बोझ
खाद्य सुरक्षा कानून के तहत देश की 67 फीसदी आबादी को 3 और 2 रुपये किलो की दर से प्रति माह 5 किलो अनाज देने से फूड सब्सिडी पर करीब 20 हजार करोड़ रुपये का बोझ बढ़ जाएगा। फिलहाल सरकार फूड सब्सिडी पर करीब एक लाख करोड़ रुपये खर्च करती है।

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