आखिर क्या मायने हैं एंटनी के इस बयान के?
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कांग्रेस की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ दिग्विजय सिंह के बयान पर बवाल मचा हुआ है वहीं एके एंटनी के बयान पर भी पार्टी में अंदरुनी बहस छिड़ गई है।
पूर्व रक्षा मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एंटनी ने कहा था कि समाज के कुछ वर्गों को लगा कि कांग्रेस अल्पसंख्यक समुदाय की ओर झुकी हुई है।
उनके इस, बयान पर पार्टी के महासचिव शकील अहमद ने कहा है कि एंटनी की इस टिप्पणी पर निश्चित तौर पर पार्टी में बातचीत होगी।
टिप्पणी से बच रहे नेता
शकील अहमद ने कहा कि एंटनी पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। उन्होंने जो कहा है और महसूस किया है उस पर निश्चित तौर पर बहस और विमर्श होगा।
कांग्रेस के पूर्व सांसद राशिद अल्वी ने कहा कि उन्होंने एंटनी का बयान नहीं पढ़ा है। लेकिन यह निश्चित है कि पार्टी अल्पसंख्यकों के लिए प्रतिबद्ध है। कोई भी टिप्पणी करने से पहले वह एंटनी के बयान को ठीक से पढ़ना चाहेंगे। इस देश के अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करना कांग्रेस की प्रतिबद्धता में शामिल है।
पूर्व सूचना-प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी भी एंटनी के बयान पर टिप्पणी करने के मामले में सतर्क दिखे। उन्होंने कहा कि एंटनी में काफी संजीदगी है। इसलिए उनसे बातचीत किए बगैर उनके बयान पर टिप्पणी करना सही नहीं होगा।
पार्टी में छिड़ी बहस
कांग्रेस के ज्यादातर पदाधिकारी एंटनी के बयान पर कुछ भी कहने से बचते रहे। लेकिन सूत्रों का कहना है कि इसके एक महासचिव ने छह महीने पहले उन्हें पत्र लिख कर अल्पसंख्यकों के प्रति कांग्रेस के झुकाव का गलत फायदा लेने की आशंका जताई थी।
उनका कहना था कि भाजपा कांग्रेस को मुसलिम समर्थक के तौर पर प्रचारित कर सकती है। भाजपा कांग्रेस की अल्पसंख्यक समर्थक की छवि का फायदा उठा सकती है।
लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस के अंदर मंथन चल रहा है। इसी संदर्भ में पार्टी के नेता बयान दे रहे हैं। एंटनी के इस बयान को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण की ओर इशारा कर उन्होंने पार्टी में एक नई बहस छेड़ दी है।