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अंधविश्वास का विरोध किया तो सिर में मारी गोली

Tue, 20 Aug 2013 07:32 PM IST
पुणे/एजेंसी
पुणे/एजेंसी Updated Tue, 20 Aug 2013 07:32 PM IST
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anti superstition activist narendra dabholkar shot dead

अंधविश्वास के खिलाफ महाराष्ट्र में प्रगतिशील आंदोलन चलानेवाले प्रख्यात कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर की मंगलवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुणे में दाभोलकर को अनजान हमलावरों ने उस समय गोली मारी जब वह सुबह की सैर पर निकले थे।

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दाभोलकर अंधविश्वास के खिलाफ लंबे समय से अभियान चला रहे थे और अमानवीय सामाजिक नियमों के खिलाफ लोगों को एकजुट करने में लगे हुए थे।

पिछले कुछ समय से वह ‘अंधविश्वास और काला जादू विरोधी’ बिल पारित करने के लिए राज्य सरकार से सलाह-मशविरे में लगे थे। हालांकि राज्य में वारकारी समेत कई समुदाय के लोग इसका विरोध कर रहे थे।
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने दाभोलकर के हत्यारों का सुराग देने वालों के लिए दस लाख रुपये के इनाम का ऐलान किया है।

एनसीपी प्रमुख शरद पवार और महाराष्ट्र के गृहमंत्री आरआर पाटिल समेत कई अहम लोगों ने उनकी मौत पर शोक जताया है।

पुलिस के मुताबिक ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ के प्रमुख दाभोलकर आज जब सुबह की सैर कर रहे थे तो मोटरसाइकिल पर सवार दो लोगों ने उनके सिर में पीछे से कई गोलियां दाग दीं।
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चश्मदीदों का कहना है कि यह हमला ओंकारेश्वर मंदिर के नजदीक पुल पर हुआ। 69 वर्षीय दाभोलकर इसी इलाके से अंधविश्वास के खिलाफ प्रगतिशील विचारों का प्रचार करने वाली पत्रिका ‘साधना’ निकालते थे।

गोली लगने के बाद खून से लथपथ दाभोलकर की पहचान उनके बटुए में मिले उनके फोटो से हुई। इसमें अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के नाम से एक चेक भी था। उन्हें तुरंत ससून अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

उनके सिर में पीछे से चार गोलियां मारी गई थीं। पुलिस उनकी हत्या के पीछे के मकसद की जांच कर रही है।

सतारा के रहने वाले दाभोलकर समाज में विज्ञान को तरजीह देने वाली मानसिकता पैदा करने और अंधविश्वासों के खात्मे के लिए लगातार संघर्ष कर रहे थे।

गैरजरूरी सामाजिक कर्मकांडों को दरकिनार करवाना उनका मिशन बन चुका था। अपने इस उत्साह और तार्किक सोच की वजह से अक्सर उन्हें रुढ़िवादी तत्वों के विरोध का सामना करना पड़ता था।

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