1984 सिख विरोधी दंगे: तीन को उम्रकैद
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1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के मामले में दोषी ठहराए गए तीन लोगों को कड़कड़डूमा जिला अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।
यह सजा दंगा भड़काने और पांच सिखों की हत्या करने के मामले में सुनाई गई है। वहीं, दो अन्य दोषियों को दंगा फैलाने के आरोप में तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई गई है।
जिला न्यायाधीश जेआर आर्यन ने बृहस्पतिवार को पूर्व पार्षद बलवान खोखर (58), गिरधारी लाल (68) व कैप्टन भागमल (85) को उम्रकैद की सजा सुनाई।
दंगा फैलाने के अपराध के लिए पूर्व विधायक महेंद्र यादव (63) और कृष्ण खोखर (64) को तीन-तीन साल कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है।
अदालत ने इन दोनों को 25-25 हजार रुपये के निजी मुचलके और एक जमानती की शर्त पर जमानत देते हुए अपील के लिए एक माह का समय दिया है।
गौरतलब है कि इस मामले में जिला अदालत ने सज्जन कुमार को 30 अप्रैल को बरी कर दिया था।
अभियोजन पक्ष ने की थी फांसी की मांग
दोषियों की सजा पर बहस करते हुए सीबीआई के विशेष अधिवक्ता आरएस चीमा ने उन्हें फांसी की सजा देने की मांग की थी।
अभियोजन का तर्क था कि दोषियों ने केवल एक धर्म के निर्दोष लोगों को निशाना बनाया। जिनकी हत्या हुई वे लोग संबंधी और पुरुष थे। दंगा करने वाले पीड़ितों के खिलाफ नारे लगा रहे थे। इनका मकसद पीड़ित समुदाय का सफाया करना था।
बचाव पक्ष ने किया नरमी का आग्रह
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनिल शर्मा की दलील थी कि इन दोषियों का दंगों से कोई सीधा संबंध नहीं था। इन्होंने इसकी कोई योजना भी नहीं बनाई थी।
इन मामलों की सुनवाई को चलते हुए करीब तीन दशक का समय हो चुका है। इन्हें काफी सजा मिल चुकी है इसलिए सजा सुनाते हुए नरमी बरती जाए।
अदालत ने सुनाई न्यूनतम सजा
अदालत ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए अभियोजन पक्ष की मांग को खारिज कर दिया। जबकि बचाव पक्ष की दलीलों को काफी हद तक स्वीकार कर लिया।
हत्या के अपराध के लिए भारतीय दंड संहिता में मौत या फिर उम्रकैद की सजा तय है। अदालत फांसी की सजा भी सुना सकती थी, लेकिन अदालत ने दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
क्या था मामला
शिकायतकर्ता जगदीश कौर के अनुसार, उसके पति केहर सिंह, बेटे गुरप्रीत सिंह व तीन भाइयों रघुवेंद्र सिंह, नरेंद्र पाल और कुलदीप सिंह की हत्या कर दी गई थी। जगदीश का आरोप था कि उसने सज्जन कुमार को राज नगर इलाके में भड़काऊ भाषण देते हुए देखा था।