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टाडा से भी ज्यादा सख्त न बन जाए एंटी रेप लॉ
नई दिल्ली/संजय मिश्र
Updated Wed, 13 Mar 2013 07:59 AM IST
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बिटिया के साथ दरिदंगी के खिलाफ जनाक्रोश से घबरा कर लाए गए कठोर दुष्कर्म विरोधी कानून को संसद की मंजूरी दिलाने से पहले ही इसके दुरुपयोग को लेकर केंद्रीय मंत्रियों के पसीने छूट रहे हैं।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट की विशेष बैठक में इस बिल पर हुई चर्चा के दौरान बहुमत मंत्रियों ने भावावेश में आकर ड्रैकोनियन कानून नहीं बनाने की आवाज बुलंद की।
मौजूदा स्वरूप में बिल पारित होने पर इस कानून को किसी ने दुरुपयोग के लिहाज से टाडा कानून का भी बाप बनने की आशंका जताई तो कई मंत्रियों ने दहेज विरोधी कानून और एसएसी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग का आईना दिखाया।
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वहीं केंद्रीय संस्कृति मंत्री चंद्रेश कुमारी कटोच समेत दर्जन भर से ज्यादा कैबिनेट मंत्रियों ने सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र 18 से घटाकर 16 साल करने की राय का पुरजोर समर्थन किया।
कैबिनेट में कानूनी पैमाने और सामाजिक हकीकत के पहलुओं पर हुई गरमागरम बहस को देखते हुए दुष्कर्म विरोधी अध्यादेश को मौजूदा स्वरूप में ही संसद से मंजूरी मिलने की गुंजाइश बेहद कम है। करीब पौने दो घंटे चली कैबिनेट की बैठक में अध्यादेश और बिल का मसौदा तैयार करने वाले गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे परोक्ष रूप से कई मंत्रियों के निशाने पर रहे।
इस बिल में ताकझांक और पीछा करने को गैर जमानती अपराध बनाने तथा कठोर सजा के प्रावधानों पर सबसे ज्यादा ऐतराज जाहिर किया गया। सूत्रों के वित्तमंत्री पी चिदंबरम, संचार मंत्री कपिल सिब्बल, कानून मंत्री अश्विनी कुमार, सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी समेत कई मंत्रियों का साफ कहना था कि भावावेश में आ कर ऐसा कानून न बना दें जिससे बाद में पछताना पड़ जाए।
एक मंत्री ने कहा कि 80 फीसदी मामले थाने और चौकी के स्तर पर आएंगे और देश में पुलिस की कार्यशैली छुपी नहीं है। ऐसे में दुरुपयोग के मामले में यह कानून टाडा का भी बाप बन जाएगा।
वहीं एक मंत्री ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षा देने पर लाया जा रहा यह सख्त कानून कहीं महिलाओं की आर्थिक प्रगति पर अंकुश न लगा दे क्योंकि इस आशंका को नकारा नहीं जा सकता कि डर से कंपनियां महिलाओं को काम पर रखने से हिचकेंगी।
सहमति से यौन संबंध की उम्र 18 साल रखने के गृह मंत्रालय के मसौदे पर कानून मंत्री अश्विनी कुमार के साथ चिदंबरम, मनीष तिवारी, प्रफुल्ल पटेल, सिब्बल, खुर्शीद सरीखे मंत्रियों ने सवाल उठाते हुए इसे घटाकर 16 साल करने की वकालत की। चंद्रेश कुमारी ने भी इसका समर्थन किया।
इन मंत्रियों का कहना था कि कानूनी प्रावधानों को सामाजिक हकीकत से बहुत दूर नहीं जाना चाहिए। शिंदे, कृष्णा तीरथ, कुमारी शैलजा और वीरप्पा मोइली ने इसे 18 साल रखने का समर्थन किया। मोइली ने ताकझांक और पीछा करने सरीखे अपराध को गैरजमानती बनाने तथा झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान करने का विरोध किया।
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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट की विशेष बैठक में इस बिल पर हुई चर्चा के दौरान बहुमत मंत्रियों ने भावावेश में आकर ड्रैकोनियन कानून नहीं बनाने की आवाज बुलंद की।
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मौजूदा स्वरूप में बिल पारित होने पर इस कानून को किसी ने दुरुपयोग के लिहाज से टाडा कानून का भी बाप बनने की आशंका जताई तो कई मंत्रियों ने दहेज विरोधी कानून और एसएसी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग का आईना दिखाया।
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वहीं केंद्रीय संस्कृति मंत्री चंद्रेश कुमारी कटोच समेत दर्जन भर से ज्यादा कैबिनेट मंत्रियों ने सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र 18 से घटाकर 16 साल करने की राय का पुरजोर समर्थन किया।
कैबिनेट में कानूनी पैमाने और सामाजिक हकीकत के पहलुओं पर हुई गरमागरम बहस को देखते हुए दुष्कर्म विरोधी अध्यादेश को मौजूदा स्वरूप में ही संसद से मंजूरी मिलने की गुंजाइश बेहद कम है। करीब पौने दो घंटे चली कैबिनेट की बैठक में अध्यादेश और बिल का मसौदा तैयार करने वाले गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे परोक्ष रूप से कई मंत्रियों के निशाने पर रहे।
इस बिल में ताकझांक और पीछा करने को गैर जमानती अपराध बनाने तथा कठोर सजा के प्रावधानों पर सबसे ज्यादा ऐतराज जाहिर किया गया। सूत्रों के वित्तमंत्री पी चिदंबरम, संचार मंत्री कपिल सिब्बल, कानून मंत्री अश्विनी कुमार, सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी समेत कई मंत्रियों का साफ कहना था कि भावावेश में आ कर ऐसा कानून न बना दें जिससे बाद में पछताना पड़ जाए।
एक मंत्री ने कहा कि 80 फीसदी मामले थाने और चौकी के स्तर पर आएंगे और देश में पुलिस की कार्यशैली छुपी नहीं है। ऐसे में दुरुपयोग के मामले में यह कानून टाडा का भी बाप बन जाएगा।
वहीं एक मंत्री ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षा देने पर लाया जा रहा यह सख्त कानून कहीं महिलाओं की आर्थिक प्रगति पर अंकुश न लगा दे क्योंकि इस आशंका को नकारा नहीं जा सकता कि डर से कंपनियां महिलाओं को काम पर रखने से हिचकेंगी।
सहमति से यौन संबंध की उम्र 18 साल रखने के गृह मंत्रालय के मसौदे पर कानून मंत्री अश्विनी कुमार के साथ चिदंबरम, मनीष तिवारी, प्रफुल्ल पटेल, सिब्बल, खुर्शीद सरीखे मंत्रियों ने सवाल उठाते हुए इसे घटाकर 16 साल करने की वकालत की। चंद्रेश कुमारी ने भी इसका समर्थन किया।
इन मंत्रियों का कहना था कि कानूनी प्रावधानों को सामाजिक हकीकत से बहुत दूर नहीं जाना चाहिए। शिंदे, कृष्णा तीरथ, कुमारी शैलजा और वीरप्पा मोइली ने इसे 18 साल रखने का समर्थन किया। मोइली ने ताकझांक और पीछा करने सरीखे अपराध को गैरजमानती बनाने तथा झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान करने का विरोध किया।