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एंटी रेप बिल पर राज्यसभा की भी मुहर
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Thu, 21 Mar 2013 09:28 PM IST
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राज्यसभा ने महिला उत्पीड़न से जुड़े इस सख्त कानून संबंधी दंड विधि (संशोधन) विधेयक, 2013 को बृहस्पतिवार को पारित कर दिया। लोकसभा ने पहले ही इस बिल को अपनी मंजूरी दे दी है।
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बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा।
विधेयक पर संसद के दोनों सदनों की मुहर लगने पर गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि बिल में तेजाब फेंकने के साथ ही ऐसे कई अपराधों को शामिल किया गया है, जो पहले कानून से बाहर थे।
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जरूरत पड़ी तो सरकार इस विधेयक में सुधार करेगी। दुष्कर्म के मामलों में पुलिस की जिम्मेदारी तय की गई है और 2 से 6 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
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निजी और सरकारी अस्पतालों में अगर दुष्कर्म पीड़िता का तत्काल उपचार नहीं किया जाता है तो उनके लिए भी सजा का प्रावधान है।
पारित विधेयक में बलात्कार या सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अधिकतम आजीवन कारावास और दूसरी दफा ऐसा अपराध करने पर अधिकतम फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है।
पहली दफा तेजाब फेंकने पर दस साल की सजा का प्रावधान है। इस मामले में सजा की अवधि को बढ़ाकर उम्र कैद में बदली जा सकती है।
शिंदे ने कहा कि महिलाओं को निर्वस्त्र कर गांवों में घुमाने के मामले में पुलिस की जिम्मेदारी तय करते हुए सजा का प्रावधान किया गया है। नाबालिग लड़कियों की तस्करी के मामले में उम्र कैद तक की सजा और जुर्माने की बात विधेयक में कही गई है।