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'देश में मोदी की लहर नहीं, कांग्रेस के खिलाफ गुस्सा है'

Thu, 01 May 2014 06:06 PM IST
Updated Thu, 01 May 2014 06:06 PM IST
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 anti congress trend is shown as modi wave says prakash karat

लोकसभा चुनावों का सफर सात पड़ाव पार कर चुका है। 438 सीटों पर मतदान हो चुका है, दो चरणों पर बाकी है। फिर भी ये सवाल अब तक पूछा जा रहा है कि देश में 'मोदी की लहर' है या कांग्रेस के खिलाफ गुस्सा है?

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ये तो तय है कि सही जवाब 16 मई को ईवीएम बाहर आ जाएगा, लेकिन जब तक वो तारीख नहीं आती, सभी अपने-अपने तरीके से उत्तर देने की कोशिश कर रहे हैं।

तीसरे मोर्चे का विकल्प देने की कोशिश कर रहे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी महासचिव प्रकाश करात ने भी एक साक्षात्कार में 'मोदी की लहर' की पहेली को सुलझाने की कोशिश की है।
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जानबूझकर बनाई जा रही है 'मोदी की लहर'

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मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) महासचिव प्रकाश करात ने साक्षात्कार में कहा है कि 'मोदी की लहर' के नाम पर जानबूझकर
जैसा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है, दरअसल वह कांग्रेस के खिलाफ गुस्सा है।

करात के मुताबिक, ऐसे माहौल के बाद भी कई क्षे‌त्रीय पार्टियां और प्रत्याशी मजबूती से लड़ रहे हैं। कांग्रेस के खिलाफ लोगों में बहुत नाराजगी है।

चूंकि चुनाव प्रक्रिया लंबी हे, इसलिए मोदी के पक्ष में लहर का निर्माण किया जा रहा है। करात का मानना है कि अब तक जैसा मतदान रहा है, उससे कांग्रेस की हार तय हैं और क्षेत्रीय दलों को इसका फायदा होने की उम्मीद है।

अगली सरकार में ‌क्षे‌त्रीय दलों की होगी अहम भूमिका

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सीपीएम महासचिव के मुताबि‌क, देश में जैसे हालात दिख रहे हैं, वो काफी हद तक 1996 के हालात से मिलतेजुलते हैं।

चुनाव के बाद सरकार के गठन में क्षेत्रीय दलों की अहम भूमिका होगी। करात का मानना है कि लोकसभा चुनावों में भाजपा को उन्हीं राज्यों में फायदा होगा, जहां मुकाबला केवल कांग्रेस और भाजपा के बीच है।

जिन राज्यों में क्षे‌त्रीय दल मजबूत स्थिति में हैं, वहां कांग्रेस के‌ खिलाफ नाराजगी का फायदा उन्हें ही मिलेगा। चुनाव नतीजों के बाद केंद्र में एक सेक्यूलर सरकार के गठन की पूरी संभावना होगी, जिसमें वामदलों की अहम भूमिका होगी।

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क्या केंद्र में फिर होगी वाम और कांग्रेस का गठजोड़?

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यूपीए-1 में सहयोगी रह चुके वामदल आगामी लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के साथ गठजोड़ कर केंद्र में सरकार बनाने की पहल करेंगे?

प्रकाश करात ने इस सवाल के जवाब में कहाकि यह कांग्रेस पर निर्भर करेगा कि केंद्र में धर्मनिरपेक्ष सरकार में गठन के लिए क्षेत्रीय दलों का सहयोग करे। 1996 में जिस प्रकार संयुक्त मोर्चा सरकार का गठन किया गया था, वैसे ही अगली सरकार का भी गठन किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि फरवरी महीने में 11 दल इस संबंध में बातचीत कर चुके हैं। चुनाव नतीजों के बाद वे एक बार फिर साथ आकर तीसरे मोर्चा की सरकार के लिए पहल कर सकत है। अगला प्रधानमंत्री क्षे‌त्रीय दल का हो सकता है।

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