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'नया राज्य मांगकर पछताएंगे तेलंगाना के लोग'

Sat, 22 Feb 2014 02:18 PM IST
Updated Sat, 22 Feb 2014 02:18 PM IST
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another stand on telangana state

तेलंगाना का गठन हो गया है। हालांकि अब गठन की प्रकिया से जुड़े एक बड़े नेता राज्य के गठन पर नाराजगी जताई है। कांग्रेस नेता का मानना है कि तेलंगाना के लोग अपनी मांग पर बाद में पछताएंगे।

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तेलंगाना गठन में अहम भूमिका निभाने के बाद भी उन्होंने कहा है कि वे आंध्र प्रदेश के बंटवारे के पक्ष में नहीं थे। हालांकि पार्टी ने फैसला कर लिया था, इसलिए उन्हें मानना पड़ा।
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बंटवारे के विरोध का कारण गिनाते हुए उन्होंने कहा कि तेलंगाना 'लैंडलॉक्ड स्टेट' है और 10 वर्षों बाद इस राज्य के लोग इस बात पर पछताएंगे कि उन्होंन तेलंगाना की मांग क्यों की? उन्होंने दावा किया कि 10 सालों बाद सीमांध्र इस देश अग्रणी राज्य होगा।
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लैंडलॉक्ड होने का मतलब तेलंगाना का अब समुद्र से सीधा संपर्क नहीं रह गया है, जबकि सीमांध्र की सीमा समुद्र से जुड़ी है। गौरतलब है कि तेलंगाना छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक, सीमांध्र और ओडिशा से घिरा है।

बन सकता है नक्सलवाद का नया गढ़

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नवग‌ठित राज्य तेलंगाना छत्‍तीसगढ़ का पड़ोसी होगा। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद बड़ी समस्या बना हुआ है। कांग्रेस नेता का मानना है कि आने वाले समय में तेलंगाना भी नक्सलवाद का गढ़ बन सकता है।

उन्होंने कहा कि बड़े राज्य नक्सलवाद को खत्म करने में कामयाब रहे हैं। लेकिन छोटे राज्यों में ये नक्सलवाद अब भी एक समस्या है। छत्तीसगढ़ का पड़ोसी होने के नाते तेलंगाना को इससे जूझना पड़ सकता है।

कांग्रेस नेता के मुताबिक, तेलांगाना के गठन लिए चलाए गए आंदोलनों में नक्सलवादी सक्रिय रहे हैं, जैसे वे झारखंड और छत्तीसगढ़ के गठन के लिए सक्रिय थे। आने वाले समय ये नक्सलवाद तेलंगाना में एक बड़ी समस्या बन कर उभरेगा।

तेलंगाना में सांप्रदायिकता का भी खतरा

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तेलंगाना को संप्रादाय‌िकता की समस्या से भी जूझना पड़ सकता है। कांग्रेस नेता का मानना है कि तेलंगाना में भविष्य में हिंदू और मुस्लिम सांप्रदा‌यिकता उभार पर होगी, जिसकी वजह से राज्य की कानून व्यवस्‍था के लिए मुश्किलें खड़ी होंगी।

तेलंगाना का प्रमुख शहर और प्रस्‍तावित राजधानी हैदराबाद को सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। प्रस्तावित राज्य में महबूबनगर, करीमनगर, निजामाबाद जैसे जिलों भी सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील रहे हैं।

हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि तेलंगाना गठन के लिए चले आंदोलन में हिंदु और मुस्लिम आबादी की समान रूप से भागीदारी रही है। यहां तक की 2009 में एमआईएम ने आंदोलन विरोधी रुख अपनाया था, जिसके बाद उसे मुस्लिमों के विरोध का भी सामना करना पड़ा था।

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