अब केजरीवाल के गुरु ने भी गुनगुनाया नमो मंत्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यह सौ बार भी कह लिया जाए कि मौजूदा चुनाव मुद्दों और विकास के मॉडल पर लड़ा जा रहा है, लेकिन इस बात में हकीकत नजर नहीं आएगी। सच्चाई यह है कि विकास की बड़ी-बड़ी बातों से शुरू हुआ चुनाव प्रचार अब सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, निजी हमलों और व्यक्तिवाद तक पहुंच गया है।
पूरा चुनाव दो खेमों में बंटा नजर आ रहा है। राजनीतिक दलों ने कुछ ऐसा माहौल बना दिया है कि पूरा चुनाव मोदी के समर्थन या विरोध वाला बन गया है। जे जयललिता जैसे मोदी के कुछ पुराने दोस्त अब दुश्मन बनने की ओर बढ़ रहे हैं, तो कुछ विरोधी उनके मुरीद हो रहे हैं।
बनारस में नरेंद्र मोदी, अरविंद केजरीवाल और अजय राय के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की सेज सज चुकी है। इस बीच केजरीवाल के लिए एक बुरी खबर है। उनके गुरु भी अब बचते-बचाते नरेंद्र मोदी की तारीफ करने लग गए हैं।
रिमोट कंट्रोल से नहीं चलेगी सरकारः अन्ना
नरेंद्र मोदी के गुजरात के विकास वाले मॉडल की आलोचना करने के बावजूद अरविंद केजरीवाल के पुराने गुरु अन्ना हजारे ने अब कहा है कि अगर सत्ता में आई, तो मोदी की अगुवाई वाली सरकार केंद्र में मौजूदा प्रशासन से 'कुछ बेहतर' है।
दिल्ली में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से नई राजनीतिक जमीन तैयार करने वाले अन्ना हजारे ने कहा, "कम से कम ये बाहर से रिमोर्ट कंट्रोल के जरिए तो नहीं चलाई जाएगी।"
इस आंदोलन के बाद अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के रास्ते अलग हो गए थे। अरविंद केजरीवाल ने राजनीति में कूदकर नई पार्टी बनाने का फैसला किया, जबकि अन्ना सियासत से दूर रहना बेहतर समझते हैं।
मोदी की कमियां भी गिनाईं
हालांकि, अन्ना हजारे यह साफ करना भी नहीं भूले कि पीएम पद तक पहुंचने के लिए मोदी सबसे अच्छे शख्स नहीं। उन्होंने कहा, "वो राइट टू रिजेक्ट, राइट टू रिकॉल या ग्राम पंचायत के स्तर पर सत्ता के विकेंद्रीकरण जैसे बड़े सुधार लाने की स्थिति में नहीं होंगे।"
उन्होंने कहा, "हकीकत यह है कि न मोदी और न ही राहुल गांधी ऐसा कर सकते हैं। जब तक पक्ष और राजनीतिक दल चुनावी प्रक्रिया पर हावी रहेंगे, देश को सच्चा लोकतंत्र नहीं मिल सकेगा।"
अन्ना हजारे ने इस बात का संकेत भी दिया कि लोकसभा चुनावों के बाद वो देश भर में नागरिक आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "इस बात को लेकर जागरुकता फैलाने की जरूरत है कि उन्हें पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर ईमानदार नेताओं को संसद भेजना होगा।"
फिर आंदोलन करेंगे अन्ना
अन्ना हजारे ने कहा, "इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि इस तरह के नेता सत्ता में हों या विपक्ष में बैठें।" उन्होंने बताया कि इस आंदोलन को 40 और एक्टिविस्ट का समर्थन हासिल है। उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या वो भविष्य में चुनाव लड़ेंगे।
उन्होंने भले यह कहा हो कि मोदी की अगुवाई वाली सरकार रिमोर्ट कंट्रोल से नहीं चलेगी, लेकिन यह भी कहा कि उनकी भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन समिति को राज्य में मोदी के तहत चलने वाली सरकार के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा, "अगर मोदी भ्रष्टाचार के खिलाफ होते, तो उन्होंने राज्य के लोकायुक्त को पूरी ताकत क्यों नहीं दी?"
अन्ना ने फिर दोहराया कि अरविंद केजरीवाल की प्रधानमंत्री बनने की भूख ने राजधानी में आम आदमी पार्टी की सरकार गिरवा दी। उन्होंने कहा, "मैं पहले ही कह चुका हूं कि यह एक गलती थी।"