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लोकपाल को लेकर अन्ना-केजरीवाल में ठनी
अमर उजाला, नई दिल्ली, रालेगण सिद्धि
Updated Mon, 16 Dec 2013 10:21 AM IST
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लोकपाल के मुद्दे पर एक-दूसरे के करीब आए समाजसेवी अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के बीच अब उसी लोकपाल पर ठन गई है। दोनों ही सरकारी लोकपाल बिल को लेकर एक-दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आमने-सामने आ गए हैं।
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केजरीवाल ने रविवार को कहा कि सरकारी लोकपाल विधेयक को अन्ना की ओर से समर्थन दिए जाने से वह मायूस हैं। अन्ना को संभवत: इस विधेयक की खामियों की जानकारी नहीं दी गई है। इसीलिए वह उसका समर्थन कर रहे हैं।
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केजरीवाल ने कहा कि वह अन्ना से मुलाकात कर उन्हें इस विधेयक की खामियों के बारे में बताएंगे। केजरीवाल के बयान के दो घंटे बाद ही अन्ना ने पलटवार करते हुए केजरीवाल को बिल की कॉपी पढ़ने की नसीहत दे दी।
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पढ़ें:- 'सरकारी लोकपाल से एक चूहा भी जेल नहीं जाएगा'
उन्होंने कहा कि अगर केजरीवाल को लगता है कि बिल में कमियां हैं तो पारित होने के बाद वे भूख हड़ताल पर बैठ सकते हैं। अन्ना ने कहा कि बिल से उनकी ज्यादातर उम्मीदें पूरी हो चुकी हैं।
इससे पहले लोकपाल को कमजोर बताते हुए केजरीवाल ने कहा कि इस बिल से भ्रष्ट राजनेताओं को तो दूर किसी चूहे तक को जेल नहीं भेजा जा सकता। अलबत्ता इस विधेयक के बारे में देश को बरगलाने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को इसे संसद से पारित कराने का श्रेय मिल जाएगा।
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केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि लोकपाल विधेयक का मौजूदा स्वरूप उनकी पार्टी को मंजूर नहीं है। उनकी पार्टी बेहतर लोकपाल विधेयक लाने और उसके दायरे में केंद्रीय जांच ब्यूरो को भी रखने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि अगर सीबीआई को स्वतंत्र कर दिया जाए तो हमारे प्रधानमंत्री भी टूजी और कोयला घोटाले में जेल जा सकते हैं।
उन्होंने अन्ना से अपना अनशन खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि उनकी सेहत देश और आंदोलन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने कहा कि अन्ना के आसपास कुछ ऐसे लोग हैं जो उन्हें बहका रहे हैं। अन्ना से मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर केजरीवाल ने कहा कि तबियत ठीक होने पर मौका मिलते ही वह उनसे मिलने जाएंगे।
वहीं, अन्ना ने कहा कि हमने सिटीजन चार्टर समेत जिन तीन मुद्दों के लिए अभियान चलाया था, उन्हें इस बिल में शामिल कर लिया गया है। इस बिल में सीबीआई पर सरकार का नियंत्रण खत्म कर दिया गया है।
बिल में शामिल बिंदुओं को देखने के बाद ही मैं कह रहा हूं कि यह लोगों और देश के लिए फायदेमंद है। साथ ही अन्ना ने कहा है कि वह बिल को राज्यसभा में रखने के लिए सरकार के आभारी हैं।
अन्ना की राय के विपरीत केजरीवाल के सक्रिय राजनीति में हाथ आजमाने से शुरू हुई खटपट अब स्थायी दूरी में तब्दील होती लग रही है। खास बात यह है कि लोकपाल के मुद्दे पर पास आए अन्ना और केजरीवाल के फिर से दूर होने की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका लोकपाल ही निभा रहा है।