हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद अन्ना-ममता की राहें अलग
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समाजसेवी अन्ना हजारे के यू टर्न से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी के राष्ट्रीय ‘सपने’ को तगड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को दोनों की राहें जुदा होने की तस्वीर पूरी तरह से साफ हो गई।
दो दिन पहले दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली में न पहुंचने वाले अन्ना ने साफ किया है कि उनकी रैली में न पहुंचने की वजह बीमारी नहीं थी बल्कि मैदान में आम लोगों की कम भीड़ के चलते वह नहीं आए थे।
ममता की तारीफ
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री हैं, लेकिन वह उनकी पार्टी को समर्थन नहीं करेंगे। अन्ना हजारे का कहना है कि उन्हें बताया गया था कि रैली तृणमूल कांग्रेस की है और उन्हें इसमें हिस्सा लेना है।
जबकि ममता बनर्जी का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन छेड़ने वाले अन्ना के कहने पर ही रामलीला मैदान में रैली का आयोजन किया गया था। यही नहीं उन्होंने अप्रत्यक्ष तौर पर अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह हमारी पार्टी की रैली नहीं थी।
संतोष भारतीय पर अन्ना का निशाना
उन्होंने यह भी कहा कि जब 1977 में इंदिरा गांधी चुनाव हारी थीं, उस समय हमने 5-6 लोगों के साथ भी रैली की थी। हम दो लोगों के साथ भी रैली कर सकते हैं। इससे पहले शुक्रवार को कांस्टीट्यूशन क्लब में अन्ना हजारे ने कहा, ‘संतोष भारतीय ने हमें धोखा दिया।
हमें बताया गया था कि रामलीला मैदान में तृणमूल कांग्रेस की रैली है। बड़ी तादाद में लोग इकट्ठा होंगे। जबकि ममता बनर्जी को जानकारी दी गई कि रैली मेरी है, जिसमें उन्हें हिस्सा भर लेना है।’ उन्होंने कहा, ‘सुबह से ही हर घंटे मैंने रैली स्थल के बारे में जानकारी ली।
'हमें गुमराह किया गया'
मुझे हैरत इस बात पर हुई कि आखिर तक दो-ढाई हजार लोग ही रैली स्थल पर पहुंचे। इससे लगा कि कुछ गड़बड़ है। यह भूल थी, यह धोखाधड़ी थी। इस मामले में हमें गुमराह किया गया।
लिहाजा रैली में शामिल होने से मैंने इनकार कर दिया।’ उन्होंने कहा कि वे लोकसभा चुनाव में किसी का प्रचार नहीं करेंगे। वे किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करते, लेकिन एक इंसान के तौर पर ममता बनर्जी देश के सभी मुख्यमंत्रियों में सर्वश्रेष्ठ हैं।
फिलहाल, कोई भी सियासी शख्सियत प्रधानमंत्री बनने के काबिल नहीं है। मौजूदा किसी भी नेता के हाथ में देश का भविष्य सुरक्षित नहीं है। कांस्टीट्यूशन क्लब में लोकादेश-2014 नामक कार्यक्रम में अन्ना के साथ समाजसेवी राजेंद्र सिंह, एसएन सुब्बाराव व सुनीलम समेत कई समाजसेवियों ने हिस्सा लिया।
चलाएंगे जागरूकता अभियान
अन्ना हजारे की सहयोगी सुनीता गोदारा ने बताया कि अन्ना 23 मार्च को शहीद दिवस पर पंजाब के फिरोजपुर में करीब पांच सौ युवाओं के साथ उपवास करेंगे। इसके बाद 31 मार्च को झारखंड व एक अप्रैल को ओडिशा में लोगों के बीच होंगे।
फिर, पांच जून को रालेगण सिद्घि में हर राज्य से करीब सौ कार्यकर्ताओं के साथ प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत होगी। वहीं, अन्ना ने बताया कि दूसरी आजादी का संघर्ष शुरू हो रहा है।
दस साल तक लोगों के बीच जागरूकता फैलाई जाएगी। इस दौरान संविधान की मूल भावना के अनुसार पक्ष-पार्टी विहीन जनतंत्र की स्थापना की जाएगी।