फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Anna and mamta split

हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद अन्ना-ममता की राहें अलग

Fri, 14 Mar 2014 11:12 PM IST
Updated Fri, 14 Mar 2014 11:12 PM IST
विज्ञापन
Anna and mamta split

समाजसेवी अन्ना हजारे के यू टर्न से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी के राष्ट्रीय ‘सपने’ को तगड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को दोनों की राहें जुदा होने की तस्वीर पूरी तरह से साफ हो गई।

विज्ञापन


दो दिन पहले दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली में न पहुंचने वाले अन्ना ने साफ किया है कि उनकी रैली में न पहुंचने की वजह बीमारी नहीं थी बल्कि मैदान में आम लोगों की कम भीड़ के चलते वह नहीं आए थे।

विज्ञापन

ममता की तारीफ

Anna and mamta split

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री हैं, लेकिन वह उनकी पार्टी को समर्थन नहीं करेंगे। अन्ना हजारे का कहना है कि उन्हें बताया गया था कि रैली तृणमूल कांग्रेस की है और उन्हें इसमें हिस्सा लेना है।

जबकि ममता बनर्जी का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन छेड़ने वाले अन्ना के कहने पर ही रामलीला मैदान में रैली का आयोजन किया गया था। यही नहीं उन्होंने अप्रत्यक्ष तौर पर अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह हमारी पार्टी की रैली नहीं थी।

संतोष भारतीय पर अन्ना का न‌िशाना

Anna and mamta split

उन्होंने यह भी कहा कि जब 1977 में इंदिरा गांधी चुनाव हारी थीं, उस समय हमने 5-6 लोगों के साथ भी रैली की थी। हम दो लोगों के साथ भी रैली कर सकते हैं। इससे पहले शुक्रवार को कांस्टीट्यूशन क्लब में अन्ना हजारे ने कहा, ‘संतोष भारतीय ने हमें धोखा दिया।

हमें बताया गया था कि रामलीला मैदान में तृणमूल कांग्रेस की रैली है। बड़ी तादाद में लोग इकट्ठा होंगे। जबकि ममता बनर्जी को जानकारी दी गई कि रैली मेरी है, जिसमें उन्हें हिस्सा भर लेना है।’ उन्होंने कहा, ‘सुबह से ही हर घंटे मैंने रैली स्थल के बारे में जानकारी ली।

विज्ञापन

'हमें गुमराह किया गया'

Anna and mamta split

मुझे हैरत इस बात पर हुई कि आखिर तक दो-ढाई हजार लोग ही रैली स्थल पर पहुंचे। इससे लगा कि कुछ गड़बड़ है। यह भूल थी, यह धोखाधड़ी थी। इस मामले में हमें गुमराह किया गया।

लिहाजा रैली में शामिल होने से मैंने इनकार कर दिया।’ उन्होंने कहा कि वे लोकसभा चुनाव में किसी का प्रचार नहीं करेंगे। वे किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करते, लेकिन एक इंसान के तौर पर ममता बनर्जी देश के सभी मुख्यमंत्रियों में सर्वश्रेष्ठ हैं।

फिलहाल, कोई भी सियासी शख्सियत प्रधानमंत्री बनने के काबिल नहीं है। मौजूदा किसी भी नेता के हाथ में देश का भविष्य सुरक्षित नहीं है। कांस्टीट्यूशन क्लब में लोकादेश-2014 नामक कार्यक्रम में अन्ना के साथ समाजसेवी राजेंद्र सिंह, एसएन सुब्बाराव व सुनीलम समेत कई समाजसेवियों ने हिस्सा लिया।

चलाएंगे जागरूकता अभियान

Anna and mamta split

अन्ना हजारे की सहयोगी सुनीता गोदारा ने बताया कि अन्ना 23 मार्च को शहीद दिवस पर पंजाब के फिरोजपुर में करीब पांच सौ युवाओं के साथ उपवास करेंगे। इसके बाद 31 मार्च को झारखंड व एक अप्रैल को ओडिशा में लोगों के बीच होंगे।

फिर, पांच जून को रालेगण सिद्घि में हर राज्य से करीब सौ कार्यकर्ताओं के साथ प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत होगी। वहीं, अन्ना ने बताया कि दूसरी आजादी का संघर्ष शुरू हो रहा है।

दस साल तक लोगों के बीच जागरूकता फैलाई जाएगी। इस दौरान संविधान की मूल भावना के अनुसार पक्ष-पार्टी विहीन जनतंत्र की स्थापना की जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed