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भाजपा में यही बुरा हाल रहा तो क्या जीत पाएंगे मोदी?

Fri, 02 May 2014 01:59 PM IST
अनुपम निशान्त/अमर उजाला, वाराणसी
अनुपम निशान्त/अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 02 May 2014 01:59 PM IST
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anger of local bjp leaders in varanasi

भाजपा के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी की वाराणसी सीट से उम्मीदवारी को लेकर ऊपर से तो पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ा उत्साह दिखा रहे हैं, लेकिन अंदरखाने में असंतोष भी पनप रहा है।

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वजह, पर्दे के पीछे से समूचे चुनाव प्रबंधन की कमान अमित शाह की देखरेख में टीम गुजरात ने संभाल रखी है लेकिन आगे किया गया है स्थानीय चेहरों को। स्थानीय नेता भी स्वीकारते हैं कि जो कुछ हो रहा है, उन्हीं लोगों के कहने पर किया जा रहा है।
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अब इन नेताओं को इस बात की चिंता सता रही है कि अगर मोदी जीतते हैं तो इसका श्रेय टीम गुजरात ही ले जाएगी। खुदा न खास्ता मोदी हार गए या जीत का अंतर कम रहा तो इसका ठीकरा उनके ही सिर फोड़ा जाएगा। यानी चित भी उनकी और पट भी उनकी।

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छलका स्थानीय नेताओं का दर्द

anger of local bjp leaders in varanasi

स्थानीय चुनाव संचालन समिति से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि लगभग रोज सुबह या रात में टीम गुजरात के सदस्यों के साथ उनकी बैठकें होती हैं। जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है, बैठकों का सिलसिला तेज हो गया है। कुछ और कुरेदने पर उनकी पीड़ा छलक आई। कहने लगे, बड़ी समस्या है।

बैठकों में स्थानीय लोगों को सिर्फ निर्देश दिए जाते हैं। अगर किसी ने कोई सुझाव दिया तो उसे सुना जाता है पर क्रियान्वयन कैसे होना है, यह टीम गुजरात ही तय करती है। ऐसे में बड़ा बंधन सा महसूस होता है।

चुनाव प्रबंधन से जुड़े एक और नेता ने कहा, क्या करें, वे लोग जो भी कहते हैं सुनना तो पड़ता ही है। मामला हाई प्रोफाइल है। मोदी से जुड़ा है और अमित शाह जैसा शख्स मानीटरिंग कर रहा है तो ऐसे में हम क्या कहें, कैसे कहें...।

गांवों में भाजपा का नहीं हो रहा बेहतर प्रचार

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रोहनिया विधानसभा क्षेत्र के एक कार्यकर्ता ने कहा कि सारा प्रबंधन गुजरात के लोगों द्वारा किए जाने से इस बार अब तक प्रचार के लिए भी पैसा नहीं मिला है। इसका असर यह हो रहा है कि गांवों में भाजपा के पक्ष में प्रचार उस तरह नहीं हो पा रहा जैसा अन्य दलों का हो रहा है।

इस बाबत टीम गुजरात के एक सदस्य का कहना है, ‘ऐसा बिलकुल नहीं है। कहीं कोई असंतोष जैसी स्थिति पार्टी में नहीं है। चुनाव प्रबंधन का सारा काम तो स्थानीय टीम ही कर रही है। हम लोग तो बस उनके सहयोग के लिए यहां रुके हैं।’

स्थानीय चुनाव संचालन समिति के संयोजक अशोक धवन का कहना है कि स्थानीय पदाधिकारियों-कार्यकर्ताओं में किसी तरह का असंतोष नहीं है। सभी जी-जान से चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं।

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