जानिए आखिर कौन था वो लादेन का मददगार 'भारतीय भाई'?
दुनिया भर में दहशत फैलाने वाले कुख्यात आतंकी संगठन अल कायदा का सरगना रहा ओसामा बिन लादेन मारे जाने से पहले तक अमेरिका पर हमले करवाना चाहता था। उसने आतंकी संगठन के आतंकियों को अंदरूनी कलह को छोड़कर अमेरिका पर हमले पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए थे।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने बुधवार को लादेन से जुड़े सौ से ज्यादा दस्तावेजों को उजागर किया है। इनमें से एक दस्तावेज में यह भी पता चला है कि लादेन अपने बेटे हमजा को अल कायदा का उत्तराधिकारी बनाना चाहता था। हालांकि उसकी यह आस अधूरी ही रह गई।
ये पत्र अमेरिकी नेवी सील के कमांडो ने 2 मई, 2011 को पाकिस्तान के एबटाबाद में मार गिराने के बाद बरामद किए थे। इन दस्तावेजों को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने मूल से अंग्रेजी में अनुवाद किया था।
दस्तावेजों में शामिल एक डायरी के मुताबिक, एक शख्स ने ओसामा बिन लादेन की कई बार आर्थिक मदद की। उसने अपनी डायरी में उसका जिक्र 'मदीना के भारतीय भाई' के रूप में किया है।
मदीना का भारतीय भाई दे रहा था लादेन को पैसे
'मदीना के भारतीय भाई' ने लादेन को कई बार पैसे भेजे। दस्तावेजों में मिली एक रसीद के मुताबिक, उसने मई, 2008 को ओसामा को 292,400 पाकिस्तानी रुपए भेजे। जुलाई, 2009 में उसने 335,000 पाकिस्तानी रुपए भेजे थे।
लादेन ने पैसा लाने वाले संदेशवाहक को बतौर टिप 5000 रुपए भी दिए थे। दस्तावेज के अनुसार, 'मदीना के भारतीय भाई' समेत कई ऐसे शख्स थे, जो लादेन की आर्थिक मदद किया करते थे। उनमें कुछ आईएसआई से भी जुड़े थे और कुछ पाकिस्तान के जिहादी संगठनों से।
लादेन की डायरी में आर्थिक मदद करने वालों को 'पवित्र बहनें' कहकर भी संबोधित किया गया है। उन पवित्र बहनों ने अपने सोने बेचकर लादने की मदद की।
5 अप्रैल, 2011 को लिखे के एक पत्र में लादेन ने आने एक सहयोगी से कहा था कि ट्राइब्स के बीच काम कर रहे जेहादियों के समर्थन के लिए कई ऐसे खर्च करने पड़ रहे हैं जिनकी अदायगी रुपए में करनी पड़ती है।
अल कायदा से जुड़े भारतीय मूल के व्यक्ति का पहली बार जिक्र
लादेन ने जिन जेहादी संगठनों का जिक्र किया है, उनमें हक्कानी नेटवर्क, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान की केंद्रीय कमेटी और पाकिस्तानी के कुख्यात जेहादी हकीमुल्लाह मेहसूद से जुड़े संगठन शामिल थे।
उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने कहा है कि पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई हक्कानी नेटवर्क के पीछे है। लादेन ने अपने पत्र में लिखा है कि हमने युद्घ की तैयारी के लिए हथियार और गोलाबारूद खरीदे हैं। ईश्वर की दया से हम पर कर्ज नहीं है।
पत्र में अल कायदा और तालिबान नेता तैय्यब आगा के बीच पत्राचार का संकेत भी है। तैय्यब आगा अमेरिका और पाकिस्तान की मध्यस्थता से जेहादियों के बीच हो रही बातचीत के मुख्य वार्ताकार हैं।
लादेन की डायरी में 'मदीना के भारतीय भाई' का आर्थिक सहयोगी के रूप में जिक्र होना चौंकाने वाला है। अब तक भारतीय मूल के किसी व्यक्ति का जिक्र अल कायदा के फाइनेंसर के रूप में नहीं आया है।
महमूद मोहम्मद बहाजीक तो नहीं 'मदीना का भारतीय भाई'
संयुक्त राष्ट्र संघ ने 2005 में सऊदी अरब के महमूद मोहम्मद बहाजीक को आंतकियों के फाइनेंसर के रूप में चिन्हित किया था। अल कायदा और लश्कर-ए-तैयबा से उनके संबध पाए गए थे। बहाजीक की मां भारतीय मूल की थीं।
माना जाता है कि आतंकी संगठनों की आर्थिक मदद के कारण ही बहाजीक को 2006 में गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि सर्वाजनिक रूप से अब तक ये पुष्टि नहीं हो पाई की बहाजिक फिलहाल कहां है, उसे गिरफ्तार किया गया तो ट्रायल का क्या हुआ।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को बहाजीक का पहली बार पता 2000 में चला था। 1993 के बाद भारत में हुई जेहादी गतिविधियों के मामले मोहम्मद आजम गौरी नाम के हैदराबाद के आंतकी की जांच की गई थी, जिसमें पता चला कि बहाजीक ने मुंबई में गौरी की आर्थिक मदद की थी। गौरी पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था।
कई और आतंकी भी हो सकते हैं 'मदीना के भारतीय भाई'
अगस्त, 2001 में हैदराबाद पुलिस को जानकारी मिली थी कि बहाजीक ने अब्दुल अजीज नाम के एक आंतकी की भी मदद की थी। अब्दुल अजीज हैदराबाद में आतंकियों की सेल बनाना चाहता था।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, बहाजीक से अजीज सऊदी अरब में मिला था। वह वहां इलेक्ट्रिशियन के रूप में काम करने गया था। अजीज ने 1996 में चेचन आतंकियों के साथ मिलकर युद्घ भी लड़ा था।
संयुक्त राष्ट्र संघ के ट्रिजरी डिपार्टमेंट के मुताबिक, बहाजीक '80 और '90 के दशक में लश्कर-ए-तैय्यबा का मुख्य फाइनेंसर था। भारतीय एजेंसियों का कहना है कि ओमानी नागरिक अब्दुल रहमान अल-हूती की मां भी भारतीय मूल का थी। उसने भी लश्कर-ए-तैय्यबा और अल कयदा की गतिविधियों को फाइनेंस किया था।
अल हूती को ओमान सरकार ने उम्र कैद की सजा दी है, उसे ओमान में आंतकी साजिश रचने का दोषी पाया गया था।
मुंबई हमले को अल कायदा ने साहसिक बताया
दस्तावेजों से ये भी पता चला है कि खूंखार आतंकी संगठन अल कायदा ने 2008 के मुंबई हमले को साहसिक अभियान बताया था। साथ ही पुणे में जर्मन बेकरी में धमाके की तारीफ की थी।
अंग्रेजी भाषा में लिखे 15 पेज के दस्तावेज में पाकिस्तानी अल कायदा और उसने जुड़े आतंकियों को अमेरिकी और उसके सहयोगी ब्रिटेन, जर्मनी और भारत के लोगों को निशाना बनाने का निर्देश दिया गया है।
इसमें कहा गया है कि मिशन का उद्देश्य अमेरिकी अर्थव्यवस्था को तबाह करना है। इसके अलावा लंदन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, मिस्र समेत अन्य देशों में अमेरिकी और यूरोपीय लोगों को निशाना बनाने वाले बम धमाकों को साहसिक करार दिया।