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जिसे बहन ने बताया था अर्जुन, उसकी शहादत पर उठे सवाल

Sun, 10 Jan 2016 07:04 AM IST
Updated Sun, 10 Jan 2016 07:04 AM IST
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an article in the telegraph on lt.col. niranjan kumar, who martyr in pathankot attack

अपने मुल्क के लिए जान देने वाला जवान ये कभी नहीं सोचता कि भविष्य में उसकी शहादत पर किसी भी तरह के प्रश्न चिन्ह लगाए जाएंगे। जिस दिन उसके बदन पर वर्दी का रंग चढ़ता है, उसी दिन से वो देश का अनमोल जवान हो जाता है।

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लेकिन पठानकोट हमले के दौरान शहीद हुए लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन कुमार की शहादत पर अंग्रेजी अखबार द टेली ग्राफ ने सवाल उठाए हैं।
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बता दें कि निरंजन पठान कोट हमले के वक्त आतंकी के शव से बंधे ग्रेनेड को अलग करने के दौरान हुए विस्फोट में शहीद हो गए थे।

क्या शहीद का दर्जा उचित?

an article in the telegraph on lt.col. niranjan kumar, who martyr in pathankot attack

द टेलीग्राफ ने अपने एक लेख में लिखा है कि 'शहीद अपने पीछे रहस्य छोड़ जाते हैं, लेकिन यह भी संभव है कि कुछ बाते सच हों। जब कोई भी व्यक्ति सशस्त्र बल में शामिल होता है तो वह अपना जीवन दांव पर लगा चुका होता है। कोई भी सैनिक अथवा सेना का अधिकारी अपनी ड्यूटी पूरी करते वक्त मर सकता है। लेकिन क्या सभी सेना के जवान जो अपनी ड्यूटी निभाते वक्त मारे जाते हैं, उन्हें शहीद का दर्जा देना उचित है?'

टेलीग्राफ के ऑप एड पेज (संपादकीय पृष्ठ के सामने वाले पृष्ठ) पर प्रकाशित किए गए लेख में जो सवाल उठाए गए हैं उनमें लिखा गया है कि निरंजन ही एक मात्र अधिकारी हैं, जिनका निधन ऑपरेशन के दौरान हुआ है।

क्या सम्मान के लायक हैं?

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टेलीग्राफ ने लिखा है कि निरंजन बॉम्ब स्क्वायड टीम के प्रमुख थे, लेकिन जब वो एक्सप्लोसिव्स को नष्ट करने के लिए गए तो उन्होंने वह यूनिफॉर्म नहीं पहनी थी, जो ब्लास्ट के दौरान उनकी रक्षा करती। लेख में लिखा गया है कि निरंजन आतंकियों के 'सरल फंदे' में फंस गए।

इतना ही नहीं यह भी लिखा गया है कि निरंजन ने आतंकी के मृत शरीर को हटाने के लिए किसी भी तरह के विशेष उपकरण, जैसे का रिमोट का सहारा नहीं लिया।

टेलीग्राफ ने निरंजन की शहादत के बारे में लिखा है कि अपने इस मूर्खतापूर्ण अथवा वाहवाही के लिए किए गए इस कृत्य के कारण निरंजन ने अपनी जान तो गंवाई ही साथ ही साथ पांच अन्य जवान भी गंभीर रूप से उस विस्फोट में घायल हो गए। इस लेख में लिखा गया है कि निरंजन के निधन के बाद सभी उसे सम्मान दे रहे हैं लेकिन यह कोई नहीं पूछ रहाहै कि 'क्या निरंजन, अपने निधन के बाद सम्मान के लायक हैं?'

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लेख का हो रहा है विरोध

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टेलीग्राफ के इस लेख का खासा विरोध हो रहा है। फेसबुक पर Indian Army Fans नाम से मौजूद पेज ने टेलीग्राफ के लेख की भर्त्सना करते हुए लिखा है कि 'टेलीग्राफ अखबार की संपादकीय टीम निर्लज्ज है।'

पेज की एक पोस्ट में लिखा गया है कि अभी शहीदों की चिता की चिंगारी ठंडी भी नहीं पड़ी है और उन्हें अपमानित किया जा रहा है। उन शहीदों के परिवारों के बारे में सोचिए जिनके हाथों में यह अखबार होगा, जो उनसे अपराधी की तरह व्यवहार करने की बात कर रहा है।'

टेलीग्राफ के लेख में भारतीय सेना और उसके मानकों पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। लिखा गया है कि 'सेना में सुरक्षा और अनुशासन के मानक गिर गए हैं।' अपने इस लेख के बाद अखबार विवादों में घिरता नजर आ रहा है।

परिवार और देश से मांगे माफी

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टेलीग्राफ के इस लेख का विरोध ट्वीटर पर भी हो रहा है। पूर्व सैनिक नवदीप सिंह ने भी ट्वीट कर के टेलीग्राफ के इस लेख का जवाब अपने ब्लॉग में दिया है।




यूजर लावण्य पवार मेनन ने लिखा है कि यह नृशंस लेख है। त्याग, त्याग होता है। देश और निरंजन के परिवार से माफी मांगनी होगी।



बहन के बताया था अर्जुन

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गौरतलब है कि निरंजन की शहादत के बाद उनकी बहन ने कहा था कि वो अपने भाई को अर्जुन के रूप में देखती हैं, जिसने कर्मभूमि के लिए अपनी जान दे दी।

पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के दौरान 7 जवान शहीद हुए थे, जिनमें निरंजन भी शामिल थे। उनका अंतिम संस्कार बेंगलुरू स्थित उनके पैतृक गांव में किया गया था।

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