एक और बयान पर फंसे AMU के कुलपति
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) छात्र संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का अधिष्ठापन समारोह कैनेडी हॉल में आयोजित किया गया। वीमेंस कॉलेज में बेतुका बयान देकर विवादों में घिरे कुलपति ले. जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरउद्दीन शाह एक दूसरे बयान के कारण छात्रों की अदालत में सफाई पेश करते नजर आए। एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष अब्दुल्लाह अज्जाम ने आरंभ में ही एक अंग्रेजी दैनिक में कुलपति द्वारा दिए गए इंटरव्यू का जिक्र कर उनकी परेशानी बढ़ा दी।
अध्यक्ष ने इंटरव्यू का हवाला देकर आरोप लगाया कि कुलपति मुस्लिम कोड ऑफ कंडक्ट को कंजरवेटिव समझते हैं। वे हमें माडर्न बनाना चाहते हैं, इसलिए छात्राओं के लिए स्वीमिंग पुल बनाना चाहते हैं। बकौल अध्यक्ष कुलपति ने इंटरव्यू में यह कहकर कि ‘मैं यहां किस और हग कैंपेन नहीं चला सकता’ कहकर मजबूरी जताई है। अध्यक्ष ने कहा कि ऐसा होने से पहले हमलोग अपना सिर कटा लेंगे। 28 हजार छात्र बिना जवाब के यहां से नहीं जाएंगे। उसके बाद अध्यक्ष ने कामन यूनिवर्सिटी बिल, कॉमन इंट्रेंस टेस्ट, प्रवेश में व्यापक स्तर पर धांधली, अल्पसंख्यक स्वरूप, डायनिंग हॉल की समस्याएं, प्लेसमेंट, कैंपस में पुलिस प्रवेश आदि का मसला मजबूती से पेश कर कुलपति से जवाब मांगे।
अपने पूरे संबोधन में कुलपति अध्यक्ष एवं अन्य नेताओं द्वारा उठाए गए सवालों पर सफाई पेश करते रहे। अपने संबोधन की शुरूआत यह कहकर की कि मुझे फख्र है कि मैं एक मुसलमान हूं। मुस्लिम कोड ऑफ कंडक्ट बदलने की बात कभी नहीं कही। ऐसी बात मेरी दिमाग में कभी नहीं आई। संवाददाता के लिखने का तरीका अपना होता है। उसने पूछा था कि लड़कियों के लिए क्या कर रहे हैं तो मैंने कहा बहुत कुछ कर रहे हैं। रहन-सहन के स्तर को इंप्रूव करने की कोशिश कर रहा हूं। हॉस्टल, स्पोर्ट्स कंपलेक्स बनाएंगे, जिसमें स्वीमिंग पूल भी होगा। वीमेंस कॉलेज में वाई-फाई सुविधा होगी। दो बस दे दी हैं और व्यवस्था कर रहा हूं।
कुलपति ने कहा कि पूर्व में मानव संसाधन विकास मंत्री से मिलने का उल्लेख कर कहा कि एएमयू को कॉमन यूनिवर्सिटी बिल व कॉमन इंट्रेंस टेस्ट मंजूर नहीं है। वो इस पर जोर देंगे तो उनको नया वीसी तलाशना होगा। यह कहकर हजारों छात्रों का दिल जीतने का प्रयास किया कि इंतजामियां के जितने फैसले होंगे, स्टूडेंट यूनियन की सहमति से होंगे। छात्र नेताओं की केंद्र सरकार विरोधी रुख देखकर यह भी समझाने का प्रयास किया कि नई सरकार साढ़े चार साल रहेगी। नहीं समझेंगे तो छात्रों को नुकसान होगा। जब तक फंड नहीं मिलेगा यूनिवर्सिटी नहीं चलेगी। उन्होंने यूनिवर्सिटी कोर्ट की मीटिंग जल्द कराने व कैंपस में पुलिस को नहीं बुलाए जाने का भरोसा छात्रों को दिलाया। कार्यक्रम को उपाध्यक्ष सैयद मसुदुल हसन, सचिव शाहजेब अहमद, लियाकत अली आदि ने किया।
एएमयू लाइब्रेरी विवाद, बात का बतंगड़ बनने का परिणाम
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के वीमेंस कॉलेज की स्टूडेंट यूनियन की नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के अधिष्ठापन समारोह में कुलपति जमीरउद्दीन शाह के बयान को लेकर जो बवाल मचा, उससे यह संदेश गया जैसे एएमयू की मौलाना आजाद लाइब्रेरी में लड़कियों के जाने पर पाबंदी हो, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है। एएमयू कैंपस में पढ़ने वाली तमाम लड़कियां मौलाना आजाद लाइब्रेरी की मेंबर बन सकती हैं। फिलहाल वहां ढाई हजार से अधिक लड़कियां मेंबर हैं। किसी भी समय में जाकर देखा जाए तो बड़ी तादाद में लड़कियां वहां पढ़ाई करती नजर आ सकती हैं। लेकिन कुलपति की जुबान जरा सी फिसली तो इसे ऐसा मुद्दा बना दिया गया जैसे एएमयू में लड़कियों के साथ भेदभाव किया जाता हो।
विवाद की वजह क्या है?
विवाद की वजह कुलपति का हल्के फुल्के मूड में दिया गया एक बयान है। सोमवार को वीमेंस कॉलेज में स्टूडेंट यूनियन की पदाधिकारियों ने मौलाना आजाद लाइब्रेरी में इस कॉलेज की छात्राओं को पढ़ने की अनुमति देने की मांग की ते कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने कहा कि मौलाना आजाद लाइब्रेरी में जगह की कमी है, जिसके चलते उन्हें अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने हल्के फुल्के मूड में यह भी कह दिया कि यदि यहां की लड़कियों को अनुमति दी गई तो लाइब्रेरी में लड़कों की संख्या चार गुना बढ़ जाएगी। कुलपति के इसी बयान को तूल देकर उन्हें महिला विरोधी साबित किया जाने लगा। कहा गया कि कुलपति नहीं चाहते कि लड़कियां लाइब्रेरी में जाकर पढ़ाई करें। जबकि हकीकत यह है कि वहां मौजूद लड़कियों को इसमें लैंगिक भेदभाव जैसा कुछ नहीं लगा था और कुलपति की इस मजाकिया बात पर उन्होंने तालियां भी बजाई थीं। राष्ट्रीय मीडिया में इस मुद्दे को तूल दिए जाने के बाद इन्हीं लड़कियों ने कुलपति के समर्थन और मीडिया के विरोध में जुलूस भी निकाला।
क्या कुलपति ने लगाया है लड़कियों पर प्रतिबंध ?
राष्ट्रीय मीडिया में जो खबरें प्रसारित हुईं उससे यह आभास होता है जैसे वर्तमान कुलपति ने मौलाना आजाद लाइब्रेरी में लड़कियों के प्रवेश पर रोक लगाई है। जबकि हकीकत यह है कि वर्तमान कुलपति ने अपनी ओर से ऐसी कोई रोक नहीं लगाई है। 1960 में जब से मौलाना आजाद लाइब्रेरी बनी है तभी से वीमेंस कालेज की लड़कियों को यहां प्रवेश न दिए जाने की व्यवस्था है।, जबकि एएमयू कैंपस में पढ़ने वाली लड़कियों को बाकायदा प्रवेश मिलता है। दरअसल वीमेंस कालेज एएमयू कैंपस से करीब तीन किलोमीटर दूर है। वहां अंडरग्रेजुएट कोर्स की कक्षाएं चलती हैं। इन छात्राओं को इतनी दूर मौलाना आजाद लाइब्रेरी में न जाना पड़े इसलिए वीमेंस कॉलेज में अपनी लाइब्रेरी है। अगर वहां कोई किताब उपलब्ध नहीं होती है तो छात्राओं की मांग पर उसे मौलाना आजाद लाइब्रेरी से मंगा कर दिया जाता है। लेकिन वीमेंस कॉलेज की लड़कियां मौलाना आजाद लाइब्रेरी में बाकायदा प्रवेश का अधिकार चाहती हैं। यह मांग गत वर्षों में भी कई बार उठ चुकी है। इस बार भी स्टूडेंट्स यूनियन के चुनाव में यह मुद्दा उठा था। इसी वजह से अधिष्ठापन समारोह में यूनियन की पदाधिकारियों ने यह मांग रखी थी और जगह की कमी बताकर कुलपति ने असमर्थता जता दी थी।
फिर विवाद क्यों उठा?
यह विवाद न उठता अगर कुलपति ने यह न कह दिया होता कि वीमेंस कालेज की लड़कियों को अनुमति दी गई तो लाइब्रेरी में लड़कों की तादाद चार गुना बढ़ जाएगी। निश्चित ही कुलपति को लाइट मूड में भी इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए था, क्योंकि यह यूनियन का अधिष्ठापन समारोह था और इसमें गंभीरता की दरकार थी। हालांकि कुलपति के इस बयान पर वहां की छात्राओं को तो कोई आपत्ति नहीं हुई लेकिन मीडिया के एक वर्ग ने इसे तूल देकर इस तरह प्रचारित किया जैसे एएमयू में लड़कियों के साथ भेदभाव किया जाता हो। इस तरह संस्थान की छवि धूमिल करने को लेकर एएमयू के छात्र-छात्राओं में रोष है और बुधवार को हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने भड़काऊ मीडिया के खिलाफ जुलूस निकाल कर विरोध प्रकट किया। अमर उजाला ने शुरू से ही मामले को अनावश्यक तूल देकर सनसनीखेज बनाने के बजाय वर्तमान हकीकत और ऐतिहासिक तथ्यों के साथ संतुलित रिपोर्टिंग की।
छात्राओं को पुस्तकालय में प्रवेश देने पर पीआईएल
अलीगढ़ विश्वविद्यालय के मौलाना आजाद पुस्तकालय में छात्राओें को प्रवेश की अनुमति देने तथा उनके बैठने के लिए अतिरिक्त स्थान की व्यवस्था करने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। गत दिनों यह मामला कुलपति जमीरउद्दीन शाह के बयान के बाद गरमा गया जब उन्होंने छात्राओं के प्रवेश को पुस्तकालय में प्रवेश देने की इजाजत नहीं दी तथा कहा कि छात्राओं के प्रवेश से भीड़ बढ़ जाएगी। अधिवक्ता दीक्षा द्विवेदी द्वारा दाखिल जनहित याचिका में कहा गया है कि छात्राओं के साथ विश्वविद्यालय प्रशासन भेदभाव कर रहा है जबकि उनको भी शिक्षा प्राप्त करने का सामान अधिकार है। छात्राओं को पुस्तकालय में प्रवेश पाने का कानूनी अधिकार है। कुलपति द्वारा लगाई गई रोक संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
'स्मृति ईरानी को सिर्फ अपनी बेटी की चिंता'
एएमयू पर उंगली उठाने वाली मानव संसाधन विकास मंत्री को सिर्फ अपनी बेटी की ही चिंता है। जब खुद महिला मंत्री अपनी बेटी को देश की सड़कों पर सुरक्षित नहीं मानती हैं, तो वह वीमेंस कालेज की छात्राओं की इज्जत को कैसे भूल गईं। (राज्यसभा में स्मृति ईरानी ने कहा था कि जब तक उनकी बेटी स्कूल से घर वापस नहीं आ जाती है। उन्हें चिंता लगी रहती है, आज बेटियां सड़कों पर सुरक्षित नहीं हैं।) यह आरोप हैं एएमयू छात्र नेताओं के। गुरुवार को एएमयू छात्र संघ के अधिष्ठापन समारोह में छात्र नेताओं ने मंत्री पर एक के बाद एक आरोपों की झड़ी लगा दी। छात्रों ने रेप के आरोपी को मंत्री बनाए जाने पर भी निशाने साधे।
एएमयू वीसी के बयान पर दखलंदाजी के बाद से केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी छात्रों के निशाने पर आ गई हैं। एएमयू छात्र यूनियन के सचिव शाहजेब ने कहा कि अगर उन्हें बेटियों की इतनी ही चिंता है तो पहले अपनी सरकार के एक सांसद और अब मंत्री से पीड़ित देश की बेटी को न्याय दिलवाएं। बजाए आरोपी सांसद को सजा देने के ईनाम स्वरूप सरकार में मंत्री बना दिया गया। उपाध्यक्ष सैय्यद मुसुदुल हसन का कहना था कि आज एएमयू के मामलों में एक ऐसी मंत्री दखल दे रही हैं, जो खुद 12वीं पास हैं। वो कैसे भूल गईं कि इस विवि का एक चपरासी भी ग्रेजुएट है। राज्यसभा में दिए स्मृति ईरानी के बयान का हवाला देते हुए एक अन्य वक्ता ने कहा कि मंत्री जी को अपनी बेटी की चिंता है। लेकिन वीमेंस कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं की इज्जत की कोई परवाह नहीं है। यही वजह है कि कॉलेज से मौलाना आजाद लाइब्रेरी की बीच के रास्ते के बारे में जानते हुए भी वह इस तरह का बयान दे रही हैं।
कॉमन यूनिवर्सिटी एक्ट में शामिल नहीं होगी एएमयू
एएमयू किसी भी हाल में कॉमन यूनिवर्सिटी एक्ट में शामिल नहीं होगी। एएमयू का अपना एक अलग एक्ट है। एएमयू पर हमले की यह एक सोची-समझी साजिश है। इसे किसी भी हाल में कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। यह कहना है एएमयू छात्र यूनियन के अध्यक्ष अब्दुला अज्जाम का। एक समारोह के दौरान मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस संबंध में एक कमेटी बनाई जाएगी। कमेटी के लिए वीसी से इजाजत ली जाएगी। कमेटी में यूनियन के पदाधिकारी और इंतजामिया के लोग होंगे। जो कॉमन यनिवर्सिटी एक्ट को पढ़कर और समझकर आगे की रूपरेखा तय करेंगे।
खुली है मौलाना आजाद लाइब्रेरी
एएमयू की मौलाना आजाद लाइब्रेरी आम दिनों की तरह ही गुरुवार को खुली रही और विद्यार्थियों के यहां आने जाने और पढ़ने का सिलसिला जारी रहा। कहीं कोई व्यवधान नहीं था। सुबह से शाम तक लाइब्रेरी में न तो कोई बंदी हुई न ही कोई दूसरी अव्यवस्था।