मदरसे समलैंगिकता के अड्डे, इन्हें बंद करो, बोले मुस्लिम प्रोफेसर
मदरसों में समलैंगिकता नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। मौलाना ऐसे कृत्यों में संलिप्त हैं। हम लोग मदरसों को हटा देना चाहते हैं। एएमयू के एक प्रोफेसर वॉट्सएप पर यह टिप्पणी कर विवादों में फंस गए हैं।
मदरसों को कठघरे में खड़ा करने वाले प्रोफेसर के विरोध में छात्र नेता उतर आए हैं। इसकी शिकायत कुलपति जमीरउद्दीन शाह से कर तत्काल कार्रवाई का दबाव बनाया जा रहा है।
एएमयू इतिहास विभाग के प्रो. वसीम रजा द्वारा वॉट्सएप के एक ग्रुप पर टिप्पणी के बाद कैंपस में खलबली मच गई है। यह टिप्पणी उन्होंने मंगलवार दोपहर को की। उसी समय से उनका विरोध भी शुरू हो गया है।
'किसी मौलाना का मैसेज लगता है...कोई काम धाम नहीं है क्या'
एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष शहजाद आलम बरनी ने इसकी शिकायत कुलपति जमीरउद्दीन शाह से की है और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
बरनी ने यह भी शिकायत की है कि प्रो. वसीम रजा ने ग्रुप के वॉट्सएप पर सजदा करते मुस्लिम लड़के की तस्वीर पर टिप्पणी की है कि ‘किसी मौलाना का मैसेज लगता है... दिन भर सजदा में... कोई काम धाम नहीं है क्या...’, ‘मौलाना तो सिर्फ सजदा ही करेगा... काम तो कुछ नहीं हो पाएगा इनसे... बाकी काम चंदा से चल जाएगा’।
शहजाद आलम बरनी ने कुलपति से प्रो. वसीम के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि इससे धार्मिक भावना आहत हुई है और पूरे समुदाय की छवि धूमिल हुई है।
इस संबंध में प्रो. वसीम का कहना है कि उनकी टिप्पणी को तकनीक की मदद से तोड़-मरोड़ कर पेश कर दिया गया है। कुछ शिक्षकों के उकसाने पर मुझे बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। उनके प्रोफेसर पद पर प्रोन्नत होने से कुछ विभागीय लोगों को जलन हो रही है। इस संबंध में ग्रुप एडमिन कामरान का कहना है कि प्रो. वसीम रजा ने यह टिप्पणी की है। शहजाद आलम जो आरोप लगा रहे हैं वह सौ प्रतिशत सही है।