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अमिताभ के आगे राजनीति के इस महाधुरंधर की भी ना चली

Sat, 29 Mar 2014 01:23 PM IST
Updated Sat, 29 Mar 2014 01:23 PM IST
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Amitabh beats Bahuguna in election

1977 में अगर उत्तर भारत में कांग्रेस का सफाया हुआ था तो कांग्रेस ने 1984 में उसका बदला लिया था जब इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उपजी सहानुभूति लहर ने विपक्ष के कई बड़े दिग्गजों को चुनावी अखाड़े में जमीन सुंघा दी थी।

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ग्वालियर में अटल बिहारी वाजपेयी और माधव राव सिंधिया जैसा ही एक और दिलचस्प चुनावी मुकाबला उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में माटी के लाल हेमवती नंदन बहुगुणा और छोरा गंगा किनारे वाला अमिताभ बच्चन के बीच भी हुआ था।
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इलाहाबाद हेमवती नंदन बहुगुणा का राजनीतिक गढ़ माना जाता था। यूं तो बहुगुणा अविभाजित उत्तर प्रदेश (तब उत्तराखंड राज्य का गठन नहीं हुआ था) के गढ़वाल इलाके के रहने वाले थे, लेकिन उनकी शिक्षा-दीक्षा इलाहाबाद में ही हुई थी। बहुगुणा की पत्नी कमला बहुगुणा भी इलाहाबाद की थीं।
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युवाओं में था अमिताभ बच्‍चन का क्रेज

Amitabh beats Bahuguna in election

हालांकि बहुगुणा लखनऊ और पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट से भी सांसद रह चुके थे। लेकिन 1984 में वह इलाहाबाद से लोकदल के उम्मीदवार थे। पूरा विपक्ष उनके पीछे एकजुट था।

ऐसे में उनके मुकाबले जब अमिताभ बच्चन को कांग्रेस ने उतारा तो यह चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया था। अमिताभ तब तक सुपर स्टार बन चुके थे।

उनकी कई फिल्में हिट हो चुकी थीं और एंग्री यंग मैन का नौजवानों में बेहद क्रेज़ था। लेकिन बहुगुणा भी राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी थे, इसलिए यह कहना मुश्किल था कि कौन जीतेगा।

बहुगुणा को अपनी लोकप्रियता पर था भरोसा

Amitabh beats Bahuguna in election

बहुगुणा को इस चुनाव में इलाहाबाद की अपनी जमीनी ताकत, पहाड़ी, कायस्थ और मुस्लिम मतदाताओं के मजबूत ध्रुवीकरण और निजी लोकप्रियता पर पूरा भरोसा था।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहते हुए उन्होंने न जाने कितने लोगों की मदद की थी और कई तरह से उपकृत भी किया था।

उन्हें चुनाव जीतने और प्रतिद्वंद्घी को हराने के सारे दांव पेंच मालूम थे और अमिताभ सियासत के खेल में बिल्कुल नौसिखिए थे, इसलिए बहुगुणा को अपनी जीत की पूरी उम्मीद थी।

अमिताभ के साथ जया भी थी प्रचार में

Amitabh beats Bahuguna in election

उधर अमिताभ को अपनी सितारा छवि, युवाओं में लोकप्रियता, कांग्रेस के प्रति सहानुभूति लहर और सबसे ज्यादा अपने इलाहाबादी होने की ताकत का भरोसा था। छोरा गंगा किनारे वाला की अपनी इलाहाबादी छवि भुनाने के लिए अमिताभ ने भी सारे फिल्मी हथकंडे अपनाने शुरु कर दिए थे।

वह इलाहाबाद की सड़कों और गलियों में जिधर भी निकलते रास्ते जाम हो जाते थे। लड़के उनके पीछे दौड़ते थे और लड़कियां अमिताभ की एक झलक पाने के लिए छज्जों और छतों पर टूट पड़ती थीं।

अमिताभ और उनकी अभिनेत्री पत्नी जया बच्चन धीरे धीरे पूरे इलाहाबाद में छा गए और बहुगुणा को लगने लगा कि उनकी सियासी जमीन खिसक रही है।

अमिताभ ने लिया बहुगुणा का आशीर्वाद

Amitabh beats Bahuguna in election

एक बारे अमिताभ और बहुगुणा का काफिला आमने सामने हो गया। दोनों के समर्थकों में पहले निकलने के लिए नारेबाजी शुरु हो गई। तनाव खासा बढ़ गया कि अचानक खुली जीप में सवार अमिताभ नीचे उतरे और उन्होंने जाकर बहुगुणा को प्रणाम किया और आशीर्वाद मांगा।

बहुगुणा ने आशीर्वाद दिया और अमिताभ ने उन्हें पहले निकलने को कहा। बहुगुणा का काफिला निकल गया और प्रशासन ने चैन की ने सांस ली।

कांग्रेस अध्यक्ष और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने दोस्त और बच्चन परिवार के वारिस अमिताभ बच्चन की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरा जोर लगा दिया।

द‌िल्‍ली के धुरंधरों ने भी की अमिताभ की मदद

Amitabh beats Bahuguna in election

दिल्ली से कई धुरंधरों ने इलाहाबाद में डेरा जमा लिया। इनमें इलाहाबाद विश्वविद्यालय और दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति के दिग्गज रहे देवी प्रसाद त्रिपाठी (डीपीटी) जैसे लोग भी थे। त्रिपाठी अब एनसीपी प्रवक्ता और सांसद हैं।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता जिनमें नारायण दत्त तिवारी, केंद्रीय मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह आदि दिग्गज भी अमिताभ की जीत के लिए जुटने वाले नेताओं में शामिल थे।

कांटे का मुकाबला धीरे धीरे अमिताभ की तरफ झुकता गया और मतदान केबाद जब नतीजे आए तो इलाहाबाद में सियासत के दिग्गज हेमवती नंदन बहुगुणा राजनीति में नौसिखिए फिल्मी सितारे अमिताभ बच्चन से 187795 वोटों से चुनाव हार गए। अमिताभ ने यह जीत भारी मतों की बढ़त से हासिल की थी।

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