जमीन पर नहीं उतर पाई अमित शाह की रणनीति
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को दिल्ली के सियासी दंगल में विपक्ष के साथ ही पार्टी के अंदर की चुनौतियों से भी दो-चार होना पड़ रहा है। दिल्ली भाजपा के लचर संगठन और नेताओं के असहयोग से निपटने की शाह की रणनीति काम नहीं कर पाई जिसके चलते शाह का चुनावी प्रबंधन जमीन पर नहीं उतर पाया।
चुनावी जंग के लिए बाहर से लाए गए नेता और कार्यकर्ता अपना अधिकांश समय पीआर में ही गंवा रहे हैं। भाजपा आलाकमान को इस बात की जानकारी मिली है कि बाहर से आए उसके ज्यादातर नेता और कार्यकर्ता जमीन पर पार्टी को मजबूती देने के बजाए अपना निजी संपर्क बढ़ाने में जुटे हैं।
जिसके कारण शाह की रणनीति को जमीन नहीं मिल पाई। अब भाजपा की अंतिम रणनीति चुनाव के दिन पर टिकी है। प्रचार के अंतिम दौर में पूरी ताकत झोंकने के बाद पार्टी का अगला प्रयास वोट प्रबंधन पर है।
बूथ प्रबंधन को अंजाम देगी पार्टी
सूत्रों के अनुसार पार्टी ने तय किया है कि वह अपने कार्यकर्ताओं के अलावा संघ कार्यकर्ताओं के जरिए बूथ प्रबंधन को अंजाम देगी। संघ के सहयोग से शाह की रणनीति भाजपा समर्थक वर्ग का सौ प्रतिशत मतदान सुनिश्चित कराने के साथ फर्जी मतदान को रोकने की है।
पीएम मोदी ने भी मतदाताओं से जमकर कर मतदान करने की अपील करते हुए जम्मू-कश्मीर से आगे निकलने को कहा है। बताया जा रहा है कि अगले दो दिनों में भाजपा का जोर फर्जी और बाहर गए मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने पर है।
यह पहला मौका है जब भाजपा के नेता दिल्ली के चुनाव को कड़ा मुकाबला बता रहे हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बुधवार को पीएम मोदी की रैली के अलावा शाह ने 4, बेदी ने 7, नवजोत सिंह सिद्धू ने 5, गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने 3, मनोज तिवारी ने 9 और गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल ने 2 चुनावी सभाओं को संबोधित किया।