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मोदी के हनुमान और संगठन के सम्राट हैं अमित शाह

Thu, 10 Jul 2014 07:52 AM IST
Updated Thu, 10 Jul 2014 07:52 AM IST
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amit shah is hanuman of narendra modi

उत्तर प्रदेश में शानदार प्रदर्शन करने का इनाम आखिरकार अमित शाह को मिल ही गया। असल में यह इनाम उनकी संगठन क्षमता को मिला है।

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सिर्फ मोदी से नजदीक होने के कारण से नहीं, अमित शाह को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के पीछे उनकी खुद की ताकत का भी महत्व है।

जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गुजरात में प्रवेश न करने की शर्त पर सोहराबुद्दीन मामले में जमानत पर रिहा किया था, तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि वह इस शर्त का इस्तेमाल अन्य राज्यों में संपर्क बढ़ाने के लिए करेंगे।

गुजरात से बाहर रहने के दौरान उन्होंने न सिर्फ संगठन में बल्कि बाहर भी अपनी पैठ जमाई, जिसका फायदा उन्हें चुनाव में मिला। अब उनकी इसी शक्ति का राष्ट्रीय स्तर पर उपयोग करने के लिए उन्हें नई जिम्मेदारी दी गई है।

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शाह ने बढ़ाया गुजरात में मोदी का रुतबा

amit shah is hanuman of narendra modi

अहमदाबाद में जन्मे अमित शाह ने बायो केमेस्ट्री में ग्रेजुएशन करने के बाद नौकरी करने के बजाय शेयर मार्केट में खुद का कारोबार शुरू किया।

छात्र जीवन से ही राजनीति में रुचि रखने वाले शाह कारोबार के साथ भाजपा में सक्रिय हुए। अपनी शक्ति का पहला परिचय देते हुए उन्होंने साबरमती विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के महारथी नरहरी अमीन को शिकस्त दी।

बाद में उन्होंने अमीन से गुजरात क्रिकेट बोर्ड भी छीन लिया, जिसके अध्यक्ष नरेंद्र मोदी बने। अमित शाह ने गुजरात भाजपा को सहकारी क्षेत्र पर कब्जा करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

एक-एक करके उन्होंने डेयरी और को ओपरेटिव क्षेत्र की यूनिटें भाजपा की झोली में डाल दी। गुजरात भाजपा मैं उनका कद बढ़ने के साथ-साथ अड़चनें भी बढ़ीं। विरोधियों की संख्या भी बढ़ती गई।

प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष दोनों गुजराती

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गुजरात के गृह राज्य मंत्री रहते हुए भी अमित शाह विवादों में घिरे रहे। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर और तुलसी प्रजापति एनकाउंटर केस में उनका नाम आया। गिरफ्तार भी हुए।

महिला जासूसी में भी उनका नाम आया। इसके बावजूद नरेंद्र मोदी ने हमेशा शाह को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी और अब उन्हें पार्टी का सबसे बड़ा पद भी दे दिया।

अमित शाह के भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के साथ ही प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष दोनों गुजराती हो गए हैं। अब शाह पर यूपी की तर्ज पर महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों में जीत दिलाने की जिम्मेदारी है। साथ ही मोदी उनसे अपेक्षा कर रहे होंगे कि वह दक्षिण के राज्यों में भी पैठ जमाने का काम करें।

(लेखक गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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