भाजपा सांसदों को अमित शाह का फरमान
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भाजपा के सांसद अब अपनी मर्जी से अपने कोटे की सांसद विकास निधि का उपयोग नहीं कर पाएंगे। सांसद की जगह पार्टी की जिला इकाई इस निधि के इस्तेमाल का अंतिम फैसला करेगी।
पार्टी की कमान संभालते ही शाह ने पार्टी सांसदों को इस आशय का फरमान जारी कर दिया है। दरअसल 16वीं लोकसभा में भाजपा में पहली बार लोकसभा पहुंचने वाले सांसदों की भरमार है।
पार्टी नेतृत्व को लगता है कि अनुभवहीनता के कारण नए सांसद इस निधि का दुरुपयोग कर पार्टी को विवाद में फंसा सकते हैं। इससे पहले 14वीं लोकसभा में कई सांसद इस निधि के इस्तेमाल में स्टिंग ऑपरेशन का शिकार हो चुके हैं।
यही कारण है कि भविष्य में इस तरह के संभावित विवादों को टालने के लिए पार्टी नेतृत्व ने सांसद निधि उपयोग के मामले में वाम दलों का फार्मूला अपनाया।
उल्लेखनीय है कि वामदलों के सांसदों की विकास निधि का फैसला भी सांसद के बदले संगठन करता आया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि शाह सांसदों के संबंध में जल्द ही कई और फरमान सुनाने वाले हैं।
कुछ और दिशानिर्देश भी होंगे जारी
अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार पार्टी के संसदीय दल को संबोधित करने वाले शाह ने सांसदों को साफ निर्देश दिया है कि अब उनकी निधि को खर्च करने का विवेकपूर्ण तरीका पार्टी की जिला इकाई ढूंढेगी। जिला इकाई ही तय करेगी कि सांसद निधि का कहां और कैसे इस्तेमाल हो।
शाह ने सांसदों को समझाया कि जिला इकाई द्वारा निधि के इस्तेमाल पर फैसला करने से सांसद बिना वजह के विवादों से भी बचेंगे।
इससे पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए सांसदों से संसद में सवाल पूछने और सांसद निधि के उपयोग में खास सावधानी बरतने की हिदायत दी थी। मोदी की इन्हीं चिताओं के मद्देनजर शाह ने निधि के इस्तेमाल में संभावित विवाद को टालने के लिए यह फार्मूला पेश किया।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि अध्यक्ष बनने के बाद शाह सांसदों के लिए कुछ और दिशानिर्देश जारी कर सकते हैं। उनकी योजना वाम दलों की तरह ही सांसदों के वेतन-भत्ते में से एक निश्चित रकम पार्टी फंड में दिलाने की है। सूत्रों के मुताबिक फिलहाल यह एक प्रस्ताव है, जिस पर शाह पार्टी के अन्य नेताओं से जल्द ही चर्चा करेंगे।