अपने सवाल से ही क्या परेशान हो जाएंगे राहुल गांधी!
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अमेठी फूड पार्क परियोजना को रद्द किए जाने के मामले में खुद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बुरी तरह घिर गए हैं। इस मामले में सरकार ने बुधवार को प्रोमोटर आदित्य बिड़ला कंपनी की ओर से यूपीए सरकार के कार्यकाल में ही लिखे गए पत्र को सामने लाकर राहुल की घेरेबंदी की।
पत्र से साफ है कि प्रोमोटर कंपनी ने 16 फरवरी 2013 को ही यूपीए सरकार को पत्र लिख कर फूड पार्कलगाने के लिए जगदीशपुर के गेल प्लांट से गैस उपलब्ध कराने की मांग की थी।
तब तत्कालीन सरकार ने कंपनी की मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया। पत्र में प्रोमोटर कंपनी ने गैस की उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद फूड पार्क स्थापित करने से पीछे नहीं हटने की भी बात कही है। उधर, मंगलवार की तरह ही बुधवार को भी इस मुद्दे पर लोकसभा में भारी हंगामा हुआ।
'मंत्री को मौका देने से मना कर दिया'
शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि जमीन की उपलब्धता और परियोजना को मंजूरी के बावजूद सरकार ने बदले की भावना से परियोजना को रद्द कर दिया।
उन्होंने सोनीपत में रेल कोच फैक्ट्री सहित यूपीए सरकार की कई मेगा परियोजनाओं को भी लटकाने का आरोप लगाया। इस पर खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर ने अपना पक्ष रखने की कोशिश की।
मगर स्पीकर ने बार-बार एक ही मुद्दे पर जवाब न देने की हिदायत देते हुए मंत्री को मौका देने से मना कर दिया। इसके बावजूद कौर अपनी जगह खड़ी रहीं। इससे नाराज स्पीकर ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी कौर के अपनी बात रखने की मांग पर अड़ने के कारण स्पीकर ने एक बार फिर से सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।