क्या राहुल गांधी के हाथ से फिसल गई अमेठी?

टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 08 May 2014 12:48 PM IST
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amethi creates last minute jitters for rahul gandhi

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गांधी परिवार का रुतबा ही कुछ ऐसा था कि पिछले दस साल में राहुल गांधी के वोटिंग के दिन कभी अमेठी में कदम रखने की जरूरत तक नहीं पड़ी। अमेठी के गांव से लेकर कस्बों तक में वोट पड़ते रहे। दिल्ली या प्रचार में कहीं और मसरूफ राहुल गांधी जीतते रहे।
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लेकिन इस बार सियासी हवा ने रुख बदला, तो राहुल को भी बदलना पड़ा। दरअसल, मतदाता अपने अंदाज और मिजाज से इस बात का अहसास वोटिंग से पहले ही करा देते हैं कि उनकी नाराजगी का स्तर कैसा है?
लोकतंत्र की ताकत भी यही है कि देश का सबसे शक्तिशाली परिवार भी जब चुनाव लड़ता है, तो बहन को कई दिन गांव की धूल फांकनी पड़ती है और भाई को अपना 'लगाव' दिखाने खुद पहुंचना पड़ता है। लेकिन बुधवार को राहुल के साथ अमेठी में जो हुआ, वो इससे पहले कभी नहीं हुआ था।
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स्‍थानीय लोगों ने उठाए राहुल पर सवाल

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