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EXCLUSIVE: अंग्रेजों को आगरा में मिली अपने पूर्वजों की कब्र

Thu, 15 Oct 2015 04:08 PM IST
Updated Thu, 15 Oct 2015 04:08 PM IST
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american found graves of their ancestors in agra

सात समंदर पार बैठे अंग्रेज अपने पूर्वजों की कब्रों का दीदार करने के लिए हिंदुस्तान के ईसाई कब्रिस्तानों की खाक छान रहे हैं। उन्हें अपने पूर्वजों की कब्रों की तलाश है।

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बुधवार को न्यू जर्सी से 16 सदस्यीय दल अपने अजीजों की कब्रों की तलाश में आगरा आया। ग्वालियर रोड स्थित गोरा कब्रिस्तान में घंटों की मशक्कत के बाद दो कब्र मिल गई हैं, जिसे देखकर सभी खुश हुए।
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अंग्रेजी हुकूमत के दौरान आगरा में रहे अंग्रेज मुलाजिमों की कब्रों पर वर्षों से जमी धूल अब हटना शुरू हो जाएगी। ग्रेगर को उनके परदादा की कब्र का पता चल गया है। कब्र देख उनकी आंखों में आंसू आ गए। कब्र को साफ करने के बाद काफी देर तक वहीं बैठे प्रार्थना करते रहे। उनके साथ आए रॉबिन ने भी कब्र मिलने पर खुशी जताई।

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‘द कैंटोनमेंट सेमिट्री आफ आगरा’ पुस्तक ने काफी मदद की

american found graves of their ancestors in agra

ग्रेगर ने कहा कि उम्मीद नहीं थी, लेकिन आगरा में अमेरिकी लेखक द्वारा लिखी गई ‘द कैंटोनमेंट सेमिट्री आफ आगरा’ पुस्तक ने काफी मदद की है। प्रतिनिधि मंडल में शामिल अधिकांश लोग ब्रिटिश हैं, लेकिन व्यवसाय के कारण अब अमेरिका में बस गए हैं। आगरा से पहले यह दल उत्तराखंड, लखनऊ, बरेली, अलीगढ़, बुलंदशहर में भी कब्रिस्तानों का भ्रमण कर चुका है।

कब्रिस्तान जाने से पहले डेलीगेशन प्रतापुपरा स्थित सेंट मेरीज चर्च गया। यहां प्रधान पुरोहित फादर मून से भेंट की। फादर मून ने बताया कि इक्का-दुक्का लोग तो आते थे, लेकिन एक साख इतने लोग पहली बार आए हैं। इन लोगों ने अपने पूर्वजों के बारे में बताया।

इस दल के लिए टूर प्रबंध करने वाली कंपनी ने आगरा के शमसुद्दीन को इनका गाइड नियुक्त किया है। वही दल के साथ आगरा, अलीगढ़, बुलंदशहर आदि जगह के इतिहास से परिचित करा रहे हैं। शमसुद्दीन ने बताया कि दल के सदस्य यहां शहर के चर्चों का भ्रमण कर पूर्वजों की धरोहरों को देखेंगे।

वैसे तो ईसाइयों के सभी कब्रिस्तान सैकड़ों वर्ष पुराने हैं, लेकिन इनमें गोरा कब्रिस्तान सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें प्रथम-द्वितीय विश्वयुद्ध से लेकर 1947 के गदर में मारे गए अंग्रेजों की कब्रें हैं। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान फैली महामारी के कारण मारे गए सैकड़ों सैनिकों की कब्र भी यहीं बनी है।

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