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मोदी सरकार की बड़ी जीत, अमेरिका नहीं देगा चुनौती

Fri, 14 Nov 2014 04:38 PM IST
Updated Fri, 14 Nov 2014 04:38 PM IST
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USA will not challenge Food Security Bill

अमेरिका ने साफ कर दिया है कि भारत के खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को उनकी तरफ से चुनौती नहीं दी जाएगी। अमेरिका के इस समर्थन से यह माना जा रहा है कि डब्ल्यूटीओ की जनरल काउंसिल भी अमेरिका के इस प्रस्ताव को मान जाएगी।

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खाद्य सुरक्षा मसले को लेकर भारत और अमेरिका के बीच समझौते को डब्ल्यूटीओ की जनरल काउंसिल में पेश किया जाएगा। वाणिज्य व उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने उम्मीद जताई है कि डब्ल्यूटीओ की जनरल काउंसिल में भी भारत के खाद्य सुरक्षा मसले पर कोई आपत्ति नहीं उठाई जाएगी।
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भारत और अमेरिका के बीच हुए इस समझौते केबाद डब्ल्यूटीओ के व्यापार सुविधा समझौते (टीएफए) को लागू करने का भी रास्ता साफ हो गया। भारत इस बात पर अडिग था कि खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और इसके बगैर भारत डब्ल्यूटीओ के व्यापार नियमों को प्रशस्त करने में अपना सहयोग नहीं देगा।
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भारत ने डब्ल्यूटीओ के कहा था कि उसे खाद्य सब्सिडी को मापने के तरीके में संशोधन करना होगा, ताकि भारत अपने किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अनाज की खरीदारी करता रहे और डब्ल्यूटीओ के नियमों की अवहेलना केबगैर उसे सस्ती दरों पर गरीबों में बेचता रहे।

मोदी के अमेरिकी दौरे के दौरान बनी भी सहमति

USA will not challenge Food Security Bill

सीतारमण ने कहा कि भारत कभी भी डब्ल्यूटीओ के व्यापार नियमों का विरोधी नहीं रहा है। भारत का मकसद अपने देश के किसानों केहित की रक्षा करना है।

डब्ल्यूटीओ के इंडिया एंड चैप्टर (39) में भारत ने खाद्य सुरक्षा मसले पर अपने रुख का विस्तृत विवरण दिया है और इसे अब डब्ल्यूटीओ के समक्ष रखा जाएगा। सीतारमण ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे के दौरान भारत के चैप्टर 39 को लेकर दोनों देशों के बीच अच्छी सहमति बन गई थी।

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत विभिन्न देशों के बीच की व्यापार प्रणाली को हर प्रकार से अपना समर्थन देता है और इस प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए भारत कटिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि बाली समझौते की शर्तें ठीक नहीं थी और हम उसमें संशोधन चाहते थे। हमने उस मसले को लेकर आवाज उठाई और हमें खुशी है कि वह मसला सुलझ गया। भारत ने साफ कर दिया था कि उसकी चिंताओं को दूर किए बगैर भारत व्यापार सुविधा समझौते के लिए राजी नहीं होगा।

खाद्य सुरक्षा पर भारत को होगा फायदा

USA will not challenge Food Security Bill

खाद्य सुरक्षा मसले पर अमेरिका के साथ समझौते को कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा कहते हैं कि इससे सिर्फ समस्या को आगे लिए टाल दिया गया है। कोई हल नहीं निकला है। उनका मानना है कि इस समझौते के बाद डब्ल्यूटीओ के साथ भारत की मोलभाव शक्ति खत्म हो गई।

क्योंकि इस समझौते से डब्ल्यूटीओ के व्यापार सुविधा समझौता (टीएफए) का रास्ता साफ हो गया और टीएफए होने के बाद अमेरिका व अन्य विकसित देश फिर से भारत के खाद्य सुरक्षा मसले पर विपरीत रुख अपना सकते हैं। क्योंकि भारत के खाद्य सुरक्षा के मसले को लेकर अभी कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है।

शर्मा के मुताबिक भारत का खाद्य सुरक्षा मसला भारत की संप्रभुता से जुड़ा है। यह देश के 60 करोड़ किसानों से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस मामले में रुख सराहनीय है, लेकिन सरकार की तरफ से यह भी बताया जाना चाहिए कि वास्तव में खाद्य सुरक्षा मसले को लेकर हुआ क्या है। इस पूरे मसले को देश के सामने रखा जाना चाहिए।

फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के महानिदेशक एवं सीईओ अजय सहाय कहते हैं कि खाद्य सुरक्षा को लेकर वर्ष 2017 तक की जो तलवार लटक रही थी, वह समाप्त हो गई। वहीं, टीएफए पर अगर भारत सरकार राजी होती है, तो इससे भारत को फायदा होगा।

इससे भारतीय व्यापार की ट्रांजेक्शन लागत में तीन फीसदी तक की कमी आ सकती है और सिर्फ तीन फीसदी की कमी से 24-25 अरब डॉलर का फायदा भारत को मिलेगा। टीएफए से भारत को दूसरा फायदा यह होगा कि व्यापार नियमों में स्थिरता आ जाएगी और नियमों में अचानक कोई बदलाव नहीं होगा। व्यापार से जुड़ा हर काम एक एजेंसी के मातहत होने से लागत में कमी आएगी।

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