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एंबुलेंस घोटाला: CBI ने कई ठिकानों पर की छापेमारी

Sun, 30 Aug 2015 08:04 AM IST
Updated Sun, 30 Aug 2015 08:04 AM IST
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ambulance scam in rajasthan

सीबीआई ने शनिवार को एंबुलेंस घोटाला मामले में जिकित्जा हेल्थकेयर लिमिटेड के मौजूदा निदेशकों के आवासीय परिसरों पर छापेमारी की। राजस्थान की भाजपा सरकार की सिफारिश पर जांच एजेंसी ने कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि कंपनी के मौजूदा निदेशकों श्वेता मंगल, नरेश जैन और रवि कृष्णा के घरों पर छापेमारी की गई।

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सीबीआई प्रवक्ता ने बताया कि आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (फर्जीवाड़ा), 468, 471 और 120बी के तहत लोक सेवकों सहित मुंबई और जयपुर स्थित निजी कंपनियों के तत्कालीन निदेशकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। तकनीकी शर्तें जानबूझकर जोड़कर कंपनी के पक्ष में निविदा जारी करने में हुई कथित अनियमितता को लेकर मामला दर्ज किया गया है।
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वर्ष 2009 में, जिकित्जा हेल्थकेयर कंपनी को राज्य में अस्पतालों या चिकित्सा केंद्र से दूर स्थित ग्रामीण इलाकों में एंबुलेंस सेवा मुहैया कराने के लिए चुना गया था। वर्ष 2015 में राज्य के ऑडिटर ने पाया कि सिर्फ कागजों में मौजूद जिकित्जा कंपनी को एंबुलेंस सेवा मुहैया कराने के लिए पैसों का भुगतान किया गया।
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ऑडिटर ने बताया कि सरकार को इन एंबुलेंसों के फर्जी चक्करों के फर्जी बिल भी थमा दिए गए। आरोप है कि यह पूरा घोटाला दस करोड़ से ज्यादा का है। जयपुर के मेयर और भाजपा नेता पंकज जोशी की शिकायत पर 31 जुलाई 2014 को शहर के अशोक नगर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

गहलोत, पायलट कार्ति चिदंबरम का भी नाम एफआईआर
एंबुलेंस घोटाले में राजस्थान सरकार द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट समेत तत्कालीन केंद्रीय मंत्री व्यालार रवि के बेटे रवि कृष्णा, तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम का भी नाम शामिल है।

जिस वक्त जिकित्जा कपंनी को एंबुलेंस सेवा मुहैया कराने के लिए चुना गया, उस वक्त गहलोत प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और कार्ति, पायलट तथा रवि कंपनी के निदेशक पद पर थे। इसके अलावा जिकित्जा हेल्थकेयर, इसके निदेशक श्वेता मंगल, तत्कालीन स्वास्थ्य राज्य मंत्री दुरु मिर्जा और तत्कालीन एनआरएचएम निदेशक को नामजद किया गया था।

'पार्टी नेताओं पर सीबीआई का चाबुक बदले की कार्रवाई'

ambulance scam in rajasthan

ललित गेट और व्यापम घोटाले के मामले को सियासी तूल देना कांग्रेस के कुछ नेताओं पर भारी पड़ रहा है। इन दोनों ही मामलों की जांच बेशक तेज नहीं हुई हो लेकिन केंद्र सरकार ने कांग्रेस के युवा नेताओं पर अपना दबाव बढ़ा दिया है।

मोदी सरकार ने राजस्थान के एंबुलेंस घोटाले में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं अशोक गहलोत, सचिन पायलट और पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम, व्यालार रवि के बेटे रवि कृष्णा के खिलाफ सीबीआई जांच को मंजूरी दे दी है। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में हरियाणा में भी दीपेंद्र हुड्डा और रणदीप सिंह सुरजेवाला के मामलों को उठाया जा सकता है।

मोदी सरकार के रणनीतिकारों की नजर राहुल खेमे के नेताओं पर है, जो व्यापम और ललित गेट को लेकर सरकार के खिलाफ सबसे ज्यादा मुखर रहे हैं। हालांकि एंबुलेंस घोटाले के मामले में केंद्र सरकार का तर्क है कि उसने राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दी है लेकिन सभी को यह पता है कि राजस्थान में भाजपा की ही सरकार है और ललित गेट में मुख्य रूप से वहां की सीएम वसुंधरा राजे ही निशाने पर थी। कांग्रेस ने केंद्र के कदम को बदले की कार्रवाई बताया है।

एंबुलेंस घोटाले में सीबीआई जांच को व्यापम और ललित गेट में मोदी सरकार की घेरेबंदी के बदले की कार्रवाई करार देते हुए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि वसुंधरा राजे में यदि हिम्मत है तो खुद के और अपने बेटे के खिलाफ जांच करवाएं। 108 एंबुलेंस सेवा में गबन के मामले की सीबीआई जांच को उन्होंने बदले की भावना से उठाया गया कदम करार दिया है।

वहीं दूसरे नेता सचिन पायलट ने कहा कि राजस्थान की राजे सरकार के कहने पर यह कदम उठाया गया है। यह बदले की भावना से उठाया गया कदम है। मुझे फंसाने की कोशिश की जा रही है। पहले भी मामले की जांच हुई है।

मगर कुछ नहीं निकला है। कांग्रेस प्रवक्ता मीम अफजल ने पार्टी नेताओं के खिलाफ एंबुलेंस घोटाले मामले में सीबीआई जांच पर कहा कि यह बदले की कार्रवाई नहीं है तो और क्या है? मगर इसके बावजूद मोदी सरकार के खिलाफ मुद्दों पर कांग्रेस झुकने वाली नहीं है। दरअसल 108 एंबुलेंस सेवा में करोड़ों रुपये के गबन के आरोप में सीबीआई ने जयपुर में 8 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

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