बदायूं गैंगरेप: अमर उजाला के सवालों पर CBI की मुहर
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कटरा सआदतगंज की दोनों बहनों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बरती गई खामियों और दिखाई गई जल्दबाजी को अमर उजाला ने भी कई बार प्रकाशित किया।
इन खामियों को पहले स्टेट फॉरेंसिक टीम ने पकड़ा, जबकि सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब की टीम के सहारे सीबीआई ने भी गड़बड़ियां पकड़ लीं।
अब जांच एजेंसी ने दोनों लड़कियों के शवों का पोस्टमार्टम फिर से कराए जाने की बात कहकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विसंगतियों को ही नहीं, अमर उजाला के सवालों पर अपनी मुहर लगा दी है।
धीमी रोशनी में किया गया था पोस्टमार्टम
मई को जब दोनों लड़कियों के शव पोस्टमार्टम हाउस लाए गए थे, अंधेरा पसर चुका था। नियमत: इस वक्त पोस्टमार्टम हो ही नहीं सकते। बावजूद इसके पुलिस-प्रशासन पोस्टमार्टम कराके लॉ एंड आर्डर बनाए रखना चाहता था। शायद इसीलिए सीएमएस डॉ. आरके वर्मा भी रात में पोस्टमार्टम करवाने को राजी हो गए। इसके लिए उन डॉक्टरों को बुलाया गया, जो बरेली से अप-डाउन करते थे और दिन की ड्यूटी पूरी कर घर जाने की जल्दी में थे।
महिला डॉक्टर पुष्पा पंत त्रिपाठी को भी रात में इस तरह के पोस्टमार्टम का अनुभव न था। जेनरेटर के जरिए जलाए गए बल्ब की धीमी रोशनी में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया निपटाई गई। इस दौरान दोनों लड़कियों के सिर नहीं खोले गए। डॉक्टर्स ने लड़कियों के जननांग से निकलने वाले वैजाइनल वॉशिंग फ्लूड, उनके सिर के बाल और नाखून को भी प्रिजर्व नहीं किया।
यही नहीं, जिस मौत को डॉक्टरों ने हैंगिंग लिखा था, फॉरेंसिक जांच में सामने आया कि दोनों की मौत दम घुटने से हुई थी। पोस्टमार्टम के समय की गई वीडियोग्राफी में डॉक्टरों की ओर से बरती गई और कई लापरवाहियां सामने आईं। उधर, शवों की अंत्येष्टि न किया जाना भी डॉक्टरों के पैनल को भारी पड़ सकता है।