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बीजेपी को राहतः कैश फॉर वोट मामले में सांसद बरी
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 22 Nov 2013 05:18 PM IST
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अदालत ने 2008 के कैश फॉर वोट मामले में समाजवादी पार्टी पूर्व महासचिव अमर सिंह, भारतीय जनता पार्टी पूर्व सांसद फग्गन कुलस्ते, अशोक अर्गल और महावीर भगौरा तथा दो अन्य सुधीन्द्र कुलकर्णी तथा सुहैल हिन्दुस्तानी को आरोपमुक्त कर दिया।
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अदालत ने अमर सिंह के पूर्व निजी सहायक संजीव सक्सेना को भ्रष्टाचार की धाराओं के अंतर्गत दोषी माना है और आरोप तय करने के आदेश दिए हैं।
विशेष न्यायाधीश नरोत्तम कौशल ने आज अपने फैसले में कहा कि स्टिंग आपरेशन में तस्वीर दिखाना मात्र भ्रष्टाचार की परिधि में नहीं आता है।
समर्थन वापसी के बाद सामने आया था स्टिंग
वर्ष 2008 में वामपंथी दलों के परमाणु ऊर्जा के मामले में केन्द्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद यह स्टिंग सामने आया था।
देश की संसदीय व्यवस्था को झकझोर देने वाली यह घटना 22 जुलाई 2008 की है। भाजपा के सांसदों ने खरीद फरोख्त का आरोप लगाते हुए संसद में नोटों के बंडल लहराये थे।
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अमर सिंह और कुलकर्णी को बताया था मास्टर माइंड
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अगस्त 2011 में अपनी पहली चार्जशीट दायर की थी। इसमें अमर सिंह और कुलकर्णी को इस पूरे मामले का मास्टर माइंड बताया गया था।
अदालत ने अमर सिंह की भूमिका के बारे में कहा उनके खिलाफ जो परिस्थितिजन साक्ष्य हैं वह.संदेह. से आगे नहीं जाते।
कुलकर्णी के संबंध में अदालत का कहना था कि उनकी भूमिका सिर्फ टेलीविजन चैनल की टीम का कुलस्ते, भगौरा और अर्गल से परिचय कराना था। ताकि सांसदों की खरीद फरोख्त की रिकार्डिंग की जा सके। बाद में सुधीन्द्र कुलकर्णी की पूरे मामले में कोई भूमिका नहीं है।
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भाजपा के तीन पूर्व सांसदों के बारे में अदालत ने कहा कि टेलीविजन चैनल को बुलाकर कैमरे के सामने आने को किसी भी तरह से यह नहीं कहा जा सकता कि यह अवैध था।
अदालत ने कहा कि सोहैल हिन्दुस्तानी ने अवैध कार्य किया इसके बारे में कोई प्रमाण नहीं है। यह मामला संसदीय समिति की सिफारिश पर वर्ष 2009 में दायर हुआ था।