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जम्मू-कश्मीर में उलझन, ये हैं सरकार बनाने के 3 रास्ते

Sun, 21 Dec 2014 07:56 PM IST
Updated Sun, 21 Dec 2014 07:56 PM IST
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alternatives to form govt in jammu kashmir.

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान खत्म होते ही सामने आए टीवी चैनलों और एजेंसियों के चुनावी सर्वेक्षण के नतीजे भाजपा के लिए थोड़ी मायूसी लेकर आए हैं।

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जम्मू कश्मीर को लेकर उलझन बनी हुई है, जहां चुनावी सर्वेक्षण के नतीजों में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत के नजदीक भी नहीं दिखाया गया है। यहां पर मुफ्ती मोहम्मद सईद की पीडीपी को सबसे बड़ी पार्टी और भाजपा को दूसरे नंबर की पार्टी बताया जा रहा है। दोनों राज्यों में वोटों की गिनती 23 दिसंबर, मंगलवार को होगी।
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जम्मू-कश्मीर में त्रिशंकु विधानसभा का अनुमान लगाया जा रहा है। 87 सदस्यों वाली विधानसभा में भाजपा 44 के जादुई आंकड़े से काफी पीछे रह सकती है। उसे विभिन्न न्यूज चैनल 25 से 33 सीटें दे रहे हैं जबकि पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है। हालांकि उसे भी पूर्ण बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। कई न्यूज चैनलों का कहना है कि कश्मीर में पीडीपी जबकि जम्मू क्षेत्र में भाजपा का दबदबा रहेगा। भाजपा का कश्मीर घाटी में खाता खुलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं लद्दाख में भाजपा और कांग्रेस 1 से 3 सीटें हासिल कर सकते हैं।

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विकल्प एक

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पीडीपी 35+ कांग्रेस 10 = 45
पीडीपी और कांग्रेस ने 2002 में मिलकर सरकार बनाई थी। पीडीपी और कांग्रेस में गठबंधन की संभावनाएं ज्यादा हैं। यह स्वाभिवक गठबंधन के रूप में देखा जा रहा है। पीडीपी संरक्षक मोहम्मद मुफ्ती और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद में चुनाव से पहले इस मुद्दे पर बातचीत भी हुई थी।

विकल्प दो
पीडीपी 35+ भाजपा 30=65

जम्मू कश्मीर में रियासत सरकारें केंद्र सरकार के साथ रहना पसंद करती हैं। इससे केंद्र से उदार मदद आसान होता है। जम्मू कश्मीर पाकिस्तान पोषित आतंकवाद का शिकार है, इसलिए भी केंद्र के साथ बेहतर समन्वय जरूरी है। पीडीपी इन मुद्दों के मद्देनजर भाजपा से संपर्क कर सकती है।

विकल्प तीन
भाजपा 30+नेकां 10+अन्य छह=46

भाजपा की पहली कोशिश होगी कि सरकार बनाने में नेकां और पीडीपी की मदद नहीं लेनी पड़े। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रचार इन दोनों दलों के विरोध पर केंद्रित रहा है। अगर सीटें कम आईं तो नेकां की ओर से पीडीपी को रोकने के लिए भाजपा के समर्थन की पहल हो सकती है। तब अन्य छह का आंकड़ा ज्यादा मुश्किल नहीं होगा।

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