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आरक्षण: हाईकोर्ट ने मांगा केंद्र और राज्य से जवाब

Sat, 04 Jul 2015 08:19 AM IST
Updated Sat, 04 Jul 2015 08:19 AM IST
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Allahabad Highcourt on reservation issue.

केंद्र और राज्य सरकार की नौकरियों तथा शिक्षा में जारी आरक्षण को समाप्त करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र तथा राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

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याचिका में यह भी मांग की गई है यदि सरकार आरक्षण समाप्त नहीं करती है तो सामान्य वर्ग के गरीबों को भी पचास में से 15 फीसदी आरक्षण कोटा दिया जाए। याचिका में आरक्षण नियमावली 1994 को चुनौती दी गई है।
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हाईकोर्ट के अधिवक्ता प्रभात कुमार सिंह ने याचिका दाखिल कर कहा है कि आरक्षण की व्यवस्था अनिश्चितकाल के लिए लागू करना संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है।
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राजपूतों को ओबीसी के दायरे में लाने की मांग

Allahabad Highcourt on reservation issue.

अधिवक्ता प्रभात कुमार सिंह ने कहा कि संविधान में 10 वर्ष के लिए आरक्षण का प्रावधान था अब इसे दस-दस वर्ष करके हर बार बढ़ा दिया जाता है। इसलिए आरक्षण व्यवस्था रोक लगाई जानी चाहिए।

याची का कहना है कि मौजूदा समय में अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग के लिए 50 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है। इस कोटे के तहत गरीब सवर्णों को लाया जाना चाहिए। उनको कोटे में 15 फीसदी आरक्षण दिया जाए। शेष 50 फीसदी सीटें सभी वर्गों के लिए खुली रखी जाएं।

याची ने क्षत्रिय (राजपूत) को भी पिछड़ा वर्ग के 27 फीसदी आरक्षण कोटे में शामिल करने की मांग की है। याचिका पर न्यायमूर्ति राजेश कुमार और न्यायमूर्ति एसबी सिंह की खंडपीठ ने चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

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