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AMU: लिंग के आधार पर भेदभाव गलत

Sat, 15 Nov 2014 12:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Sat, 15 Nov 2014 12:17 PM IST
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allahabad high court sends notice to vc of amu over library row

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में छात्राओं को पुस्तकालय में प्रवेश से रोकने के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। कोर्ट ने कहा कि लाइब्रेरी में लैंगिक आधार पर छात्राओं को रोकना असंवैधानिक है।

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विधि छात्रा दीक्षा द्विवेदी और अन्य द्वारा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने टिप्पणी की है कि विश्वविद्यालय ऐसा कोई नियम नहीं बना सकता है जो लिंग के आधार पर भेदभाव करता हो।
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मामले में हाईकोर्ट ने कुलपति और रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। उनसे दो सप्ताह में स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है। याचिका पर 24 नवंबर को अगली सुनवाई होगी।

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वीसी के खिलाफ कोर्ट में याचिका

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याचिका में कहा गया कि एएमयू के कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने मौलाना आजाद पुस्तकालय में छात्राओं को प्रवेश की अनुमति नहीं दी क्योंकि उनका मानना है कि लड़कियों को प्रवेश देने से भीड़ अधिक होगी और छात्रों का ध्यान भटकेगा।

मामले में कोर्ट का कहना था कि ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों को विवेकपूर्ण निर्णय लेना चाहिए। लिंग के आधार पर किसी को रोकना, उसके संवैधानिक अधिकारों का हनन है। ऐसा करना समानता के अधिकार का भी हनन है।

खंडपीठ ने कहा कि याचिका एक अखबार में प्रकाशित खबर को आधार बनाकर दाखिल की गई है इसलिए विश्वविद्यालय का पक्ष आना आवश्यक है। खंडपीठ ने अदालत में सुनवाई से पूर्व इससे संबंधित समाचारों के प्रकाशन को भी सही नहीं माना है।

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