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पत्नी से पीड़ित पति को तलाक का अधिकार
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Wed, 21 Aug 2013 05:05 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि पति के साथ यदि पत्नी और उसके परिवार के लोग क्रूरता करते हैं तो उसे तलाक पाने का पूरा अधिकार है।
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परिवार न्यायालय, इलाहाबाद के इस आदेश पर पहले हाईकोर्ट और अब सुप्रीमकोर्ट ने भी मुहर लगा दी है। हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय के आदेश को सही करार देते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी थी।
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क्या है पूरा मामला
इसे सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुप्रीमकोर्ट ने भी याचिका को हस्तक्षेप करने योग्य न पाते हुए खारिज कर दिया। प्रकरण उत्तराखंड में तैनात वरिष्ठ ट्रेजरी अफसर विवेक स्वरूप का है।
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ममफोर्डगंज में रहने वाले विवेक स्वरूप का विवाह 12 फरवरी 2007 को रुचिता श्रीवास्तव से हुआ था। शादी के कुछ समय बाद ही रुचिता के बर्ताव को लेकर विवेक परेशान रहने लगे।
रुचिता और उसके परिवार वालों की ज्यादतियां बढ़ती गई और उन्होंने विवेक तथा परिवार के लोगों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज करा दिया।
विवेक को 12 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। विवेक के खिलाफ घरेलू हिंसा के तहत भी केस दर्ज कराया गया। समाचार पत्रों और टीवी चैनलों में भी उनके खिलाफ समाचार प्रकाशित कराए गए।
उनके उच्च अधिकारियों को शिकायतें भेज कर मानसिक तौर से प्रताड़ित किया गया। हाईकोर्ट में विवेक का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कहा कि विवेक के साथ उनकी पत्नी ने मानसिक क्रूरता बरती है।
कोई दोष नहीं होने के बावजूद उनके खिलाफ दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज कराया गया। सामाजिक तौर पर उनकी मर्यादा को ठेस पहुंचाई गई। इसलिए परिवार न्यायालय का आदेश एकदम सही है।
हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय के आदेश को सही मानते हुए कहा था कि मौजूदा मामले में यह साबित है कि पति के साथ पत्नी ने मानसिक क्रूरता का बर्ताव किया है। इसलिए पति तलाक पाने का हकदार है।